मल्हार

मशरूम की खेती कर नवाचार को बढ़ावा दे रहा नगर का युवक धनेश्वर निषाद

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – कोरोना काल मे लाकडाउन के दौरान व्यवसाय बंद होने से चिंतित नगर के युवक ने नवाचार करने की ठानते हुए प्रयोगिक तौर पर मशरूम की खेती घर मे ही शुरू की जिसमे उनको अभूतपूर्व सफलता मिली। अब उनको अच्छी खासी कमाई भी हो रही है और दूसरों को इस खेती को अपनाने प्रेरित कर रहे है। नगर के धनेश्वर निषाद को नवाचार करने शौक पहले से ही था पर उनको कोरोना काल मे मौका मिला 2021 में लाकडाउन के दौरान यूट्यूब व अन्य सोशल साइट से मशरूम की खेती के बारे में जानकारी मिली जिस पर उन्होंने तुरंत ही अपने बाड़ी में बनाए 10 बाई 10 के कमरे में ही झूला के माध्यम से मशरूम लगाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते 25 दिनों में मशरूम के बीज अंकुरित होकर निकलने लगे तब उनको बहुत खुशी हुई और वे इसको अब व्यवसाय के रूप में बढ़ाने में लगे है। विगत दो वर्षों से मशरूम की खेती से मुनाफा हो रहा है। धनेश्वर का कहना है कि काम की कोई नही है बशर्ते कोई भी काम शुरुवात में कठिन लगता है परन्तु निरन्तर करते रहने से लाभदायक परिणाम मिलते है।

उन्होंने बताया कि वे 10 बाई 10 के कमरे में इस कार्य को दो वर्षों वर्षों से कर रहे है इस दौरान 2 लाख की कमाई भी हो गई है। मशरूम उत्पादन के बारे में बताया कि गेहूं के बीच को प्रोसेस के बाद मशरूम का बीज तैयार होता है और पैसा कटिया का बैग बनाकर पानी मे 16 से 18 घण्टे डुबाकर रखते है जिससे अन्य फंगस मर जाए और मशरूम का बीज अंकुरित हो जाए। बीच डालने के 25 दिन बाद अंकुरित होने लगता है और 5 दिन बाद मशरूम तैयार हो जाता है। इस तरह वे इसकी खेती घर मे करते है। उन्होंने बताया कि इसकी कीमत 150 से कम नही है सबसे बड़ी बात यह है कि पूरा प्रोसेस जैविक तरीके से होता है किसी भी रासायनिक खाद व दवा का उपयोग नही करते इस वजह से स्थानीय लोग पौष्टिकता के लिए मशरूम का सेवन करते है। इसमें विटामिन डी, फाइबर के साथ ही अन्य प्रकार विटामिन होते जो शरीर के लिए फायदेमंद है। विशेषज्ञ बताते है कि यह सजर काजू वेरायटी का मशरूम फायदेमंद है जिसके सेवन से विभिन्न तरह के विटामिन मिलते है।

पैरा पुटू से हो रही कमाई….

धनेश्वर ने बताया कि वे अभी पैरा पुटू (मशरूम) की खेती पिछले 4 माह से कर रहे जिसका उत्पादन भी अच्छा हो रहा है। उन्होंने बताया कि झूला मशरूम को वे ठंड के दिनों में लगाते है क्योंकि इसके लिए पर्याप्त मात्रा में नमी की आवश्यकता होती है और इस तरह 6 माह तक उत्पादित होता है और अब इस वर्ष कमरे के बाहर व अंदर पैरा पुटू की खेती शुरू की है जिसका बेहतर प्रतिसाद भी मिल रहा है। आने वाले दिनों में इन दोनों किस्म के मशरूम की खेती को व्यापक रूप से लगाकर शहरों में आपूर्ति करेंगे साथ ही यहां के अन्य किसानों को भी प्रेरित करेंगे।

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