छत्तीसगढ़

मुंगेली के नाली में मिला ऊंट, अब उसे कहां ले जाए इस गुत्थी में उलझा प्रशासन

आकाश दत्त मिश्रा

पुरानी कहावत है कि अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे। लेकिन मंगलवार को मुंगेली में ऊंट पहले तो नाली से बाहर आया और फिर कॉउ कैचर के ऊपर चढ़ गया । इस नजारे को देखने के लिए यहां बड़ी संख्या में लोग जुट गए। रेगिस्तान का जहाज वैसे भी शहरी इलाकों में दिखे तो हैरानी होती ही है।

कुछ समय पहले राजस्थान से खानाबदोश ऊंट के साथ मुंगेली पहुंचे थे । यहां वे ऊंट के साथ अपनी आजीविका कमा रहे थे। बताते हैं इसी दौरान उनका एक ऊंट बीमार पड़ गया। जिसका इलाज कराने के बाद भी वह स्वस्थ नहीं हुआ तो खानाबदोश उस बीमार ऊंट को मुंगेली में ही छोड़कर आगे बढ़ गए। लंबे समय से बीमारी के चलते ऊंट कमजोर होता चला गया और मुंगेली में ही कहीं भी सड़क किनारे बैठे उसे देखा जाने लगा। इसी बीच कमजोर हो चुका ऊंट कृषि उपज मंडी, बस स्टैंड के पास सुभाष ट्रेडर्स के सामने खुले नाली में गिर पड़ा । अच्छा खासा ऊंचाई वाला ऊंट भी काफी हद तक नाला में समा गया और सिर्फ उसकी गर्दन बाहर नजर आने लगी। पहले पहल तो लोगों ने खुद ही ऊंट को बाहर निकालने की कोशिश की। लेकिन इस प्रयास में ऊंट और घायल हो गया । इसके बाद नगर पालिका की टीम पहुंची और किसी तरह बीमार और घायल ऊंट को नाले से बाहर निकाला गया। ऊंट एक तो बीमार है, उस पर उसके बाएं पैर में भी चोट लगी है। बाहर निकालकर ऊंट का प्राथमिक उपचार किया गया। जिसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। जिला प्रशासन की पहली कोशिश तो यह है कि ऊंट का उपचार हो। जिसके बाद ऊंट को कहां रखा जाए इस पर विचार मंथन किया जायेगा।

जिला प्रशासन की टीम ने स्वस्थ होने के बाद ऊंट को कानन पेंडारी भेजने के मकसद से कानन पेंडारी के अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वाइल्डलाइफ अथॉरिटी के गाइडलाइन के अनुसार हाथी और ऊंट को जू में नहीं रखा जा सकता, इसलिए घायल ऊंट को कानन पेंडारी भेजने की संभावनाएं लगभग खत्म हो चुकी है। इसलिए संभव है कि स्वस्थ होने के बाद ऊंट को जंगल में छोड़ दिया जाए। लेकिन जंगल और ऊंट का कोई नाता है नहीं। ऊंट रेगिस्तान में पाया जाता है और जंगल में ऊंट के ना तो कोई साथी होंगे और ऊंट के शिकार होने की भी आशंका बनी रहेगी, इसलिए मुंगली के कुछ लोग चाहते हैं कि मुंगेली में मौजूद उद्यान के जीर्णोद्धार के बाद ऊंट को वहीं रहने दिया जाए। जहां एक तो ऊंट को खुराक मिल जाएगा और लोग भी ऊंट को देखकर आनंदित होते रहेंगे। फिलहाल बीमार ऊंट को बचाने की पूरी कोशिश चल रही है लेकिन मुंगेली में ऊंट का इलाज सही तरीके से कर सके ऐसा कोई पशु चिकित्सक भी नहीं है। कुल मिलाकर ऊंट नाले से बाहर तो आ चुका है लेकिन अभी भी खतरे से बाहर नहीं आ पाया है।

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