
शैलेश पांडे की सुरक्षा पिछले दिनों चुनाव के नाम पर हटा ली गई जिसके बाद उनके बंगले पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया गया
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे के साथ पार्टी के सौतेला व्यवहार करने के आरोप अक्सर लगते रहे हैं अब तो पुलिस विभाग भी उन्हें तवज्जो नहीं दे रही। चुनाव के दौरान ही भाजपा विधायक भीमा मंडावी सुरक्षाकर्मियों के मौजूद होने के बावजूद नक्सलियों के शिकार हो गए तो वही बिलासपुर जैसे बड़े विधानसभा के विधायक होने के बावजूद बिना वजह शैलेश पांडे की सुरक्षा हटा ली गई। सभी जनप्रतिनिधियों को उन्हें होने वाले संभावित खतरे के लिहाज से अलग अलग वर्गों में सुरक्षा प्रदान की जाती है
बिलासपुर विधायक को लेकर फिलहाल ऐसी ऐसी कोई बड़ी धमकी तो नहीं मिली है ,जिस वजह से उन्हें विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए लेकिन विधायक बनने के बाद उन्हें सामान्य सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी जिसे भी चुनाव के नाम पर हटा लिया गया। उनके बंगले में मौजूद सुरक्षाकर्मी चुनाव से पहले ही वापस बुला लिए गए थे, जिन्हें दोबारा उपलब्ध नहीं कराया गया है। आम आदमी की तरह विधायक बिना सुरक्षा के अपने कार्यों को निपटा रहे हैं ।ऐसे में कभी भी उनके साथ कोई बड़ा हादसा मुमकिन है। पुलिस उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं उपलब्ध करा रही,इसकी भी पुख्ता जानकारी नहीं दी गई। सुरक्षा हटाए जाने से शैलेश पांडे डरे हुए भी हैं और भावनात्मक रूप से आहत भी
बिलासपुर से अमर अग्रवाल जैसे कद्दावर मंत्री को हराने वाले शैलेश पांडे का अपनी पार्टी में ऊंचा कद होना तो चाहिए था लेकिन अफसोस यह है कि गुटीय राजनीति की वजह से ऐसा हो नहीं पाया। मंत्रिमंडल के गठन में भी उन्हें खास तवज्जो नहीं दी गई। इसके बाद भी उन्हें कोई महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया और अब सुरक्षा व्यवस्था तक हटा ली गई ।अन्य सभी विधायकों को सुरक्षा उपलब्ध है। यहां तक कि लोकसभा के अनजाने से गुमनाम प्रत्याशियों को भी सुरक्षा दी गई है। लेकिन विधायक होने के बावजूद शैलेश पांडे को सुरक्षा ना दिया जाना समझ से परे है