
चुनाव कार्य निपटने के बाद अब भले ही पुलिस इस मामले में गंभीरता के साथ जांच की बात कह रही हो लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस अब तक यही नहीं पता कर पाई है कि इस अपहरण के पीछे कौन है तो फिर अपहरणकर्ताओं तक पहुंचने की बात तो फ़िलहाल दूर की कौड़ी ही है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
विराट सराफ का 28 अप्रैल को जन्मदिन है। परिवार को उम्मीद है कि यह जन्मदिन भी विराट अपने परिवार के साथ ही मनाएगा, लेकिन पुलिस की कार्यशैली से अब परिवार का धैर्य टूटने लगा है। पुलिस की नाकामी का ही असर है कि विराट का परिवार अंधविश्वास और तंत्र मंत्र के पीछे भाग रहा है और ज्योतिष शास्त्र के नाम पर उटपटांग बातें बताकर पोंगा पंडित उनकी भावनाओं से खेल रहे हैं। 21वीं सदी में तकनीक से सब कुछ मुमकिन है। उस दौर में भी विराट की कुंडली में शनि भारी ,तो कभी उसके पश्चिम दिशा में होना, तो कभी कुछ और बातें पंडित और तांत्रिक बता रहे हैं और यही बातें अखबारों में भी छप रही है। जिससे केवल अंधविश्वास को बढ़ावा मिल रहा है। इसका हासिल कुछ भी नहीं होगा, यह सब जानते हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि पांचवें दिन भी पुलिस के हाथ खाली है और यह आरोप भी लग रहा है कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

शनिवार शाम को बिना नंबर प्लेट की वैगनआर में कर्बला कश्यप कॉलोनी से 6 साल के विराट सराफ को तीन अपहरणकर्ता उठा कर ले गए थे पुलिस का दावा था कि सुरक्षा जांच और नाकेबंदी की वजह से अपहरणकर्ता शहर से बाहर नहीं निकल पाए होंगे लेकिन अब पुलिस की थ्योरी बदल रही है और पुलिस यह मान रही है कि अपहरणकर्ता उत्तर प्रदेश या बिहार क्षेत्र के हैं और वे अपने ठिकाने तक पहुंच चुके हैं। सीसीटीवी फुटेज से साफ दिख रहा है अपहरणकर्ता मोबाइल फोन पर बात कर रहे हैं नई तकनीक से मोबाइल टावर के माध्यम से उस क्षेत्र के सभी मोबाइल फोन आसानी से ट्रेस होते हैं अपहरणकर्ताओं के आने से लेकर जाने के बीच के मोबाइल नंबर भी आसानी से ट्रेस हो सकते हैं लेकिन शायद बिलासपुर का साइबर सेल कामकाज में बेहद कच्चा है तभी तो इस मामूली क्लू तब भी पुलिस नहीं पहुंच पाई । बिलासपुर क्राइम ब्रांच हो या फिर गठित टीम, विराट अपहरण मामले में अब तक सब असफल नजर आ रहे हैं। अपनी असफलता का ठीकरा पुलिस मीडिया पर फोड़ रही है। मीडिया को सूचना उपलब्ध कराना बंद कर दिया गया है लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसा करने से विराट सराफ की सकुशल वापसी हो पाएगी। इस घटना की संवेदनशीलता इसी से समझी जा सकती है कि डीजीपी डी एम अवस्थी ने खुद 100 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम बनाई है, जिसमें कोंडागांव , बालोद और बिलासपुर के एसपी शामिल है ।

जाहिर है कि मामला बिलासपुर पुलिस के बस का नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है विराट के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही है। विराट के परिजनों का कहना है कि विराट मिर्च बिल्कुल नहीं खा सकता। दूध और बिस्कुट खा कर वह गुजारा करता था। जाहिर है अपहरणकर्ता इतने दयालु तो होंगे नहीं कि उसके खाने पीने का ख्याल रखें पता नहीं वह किस हाल में है, यही सोच सोच कर विराट की मां का हाल बुरा है। 2 दिन पहले विराट की मां ने सोशल मीडिया पर अपहरणकर्ताओं के नाम एक चिट्ठी भी लिखी थी, लेकिन इससे भी अपहरणकर्ताओं का दिल नहीं पसीजा। पुलिस की नाकामी के बाद परिवार पूजा-पाठ और पंडित से विचार करा कर शायद खुद को ढांढस बंधा रहा है। बिलासपुर के विधायक शैलेश पांडे भी मानते हैं इस मामले में पुलिस की कार्यशैली निराशाजनक है। पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से अपराध का ग्राफ बढ़ा है और पुलिस अधिकांश मामलों में नाकाम रही है, उससे विधायक भी खास खुश नहीं है और उन्होंने गृह मंत्री से बात कर इस मामले पर विशेष ध्यान देने का निवेदन किया था, जिसके बाद ही टीम का गठन तो कर दिया गया लेकिन नतीजे अब भी भी सिफर ही है ।
इधर चुनाव निपटने के बाद आईजी प्रदीप गुप्ता, एसपी अभिषेक मीणा अपने दफ्तर में बैठकर मोबाइल फोन के डिटेल्स खंगाल रहे हैं। शायद इसी से कोई सूत्र हाथ लगे । वैसे भी देश के कई ऐसे अपहरण के मामले हैं ,जिसमें फिरौती की रकम देने के बाद भी अपराधियों तक पुलिस कभी नहीं पहुंच पाई। इस मामले में सबसे अधिक हैरानी की बात यह है कि पांचवें दिन भी विराट के परिजनों के पास किसी तरह का कोई कॉल अपहरणकर्ताओं की ओर से नहीं आया। या फिर मुमकिन है पुलिस यह जानकारी मीडिया से छुपा रही हो। वैसे विराट अपहरण मामले को लेकर बिलासपुर में वह संवेदनशीलता नजर नहीं आयी, जो इससे पहले कई शहरों में दिखी थी। शायद आम लोगों को अब सड़क पर उतरना होगा जिसके बाद ही मुमकिन है, पुलिस की कार्यवाही गति पकड़े। फिलहाल तो स्थानीय पुलिस के पूरी तरह नाकाम रहने के बाद पहुंची नई टीम भी कुछ खास उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई है ,केवल संदेहिओ से पूछताछ ही हुई है, जिससे भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा हैं। पुलिस बस कयास लगा रही है लेकिन इतने भर से परिजनों के टूटते हौसले को सहारा नहीं मिलने वाला।
पुलिस को शायद इंतजार है कि अपहरणकर्ता विराट के परिजनों से संपर्क साधे और फिर वो आगे बढ़े लेकिन यही बात अपहरणकर्ता भी समझ रहे होंगे, तभी तो वे कॉल करने से बच रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो फिर यह मामला लंबा खींचेगा और एक छोटे से 6 साल के बच्चे के लिए अपने माता पिता और परिवार से दूर अपराधियों के बीच गुजरने वाला हर दिन कठिन और कठिन होता जाएगा।
चुनाव कार्य निपटने के बाद अब भले ही पुलिस इस मामले में गंभीरता के साथ जांच की बात कह रही हो लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस अब तक यही नहीं पता कर पाई है कि इस अपहरण के पीछे कौन है तो फिर अपहरणकर्ताओं तक पहुंचने की बात तो फ़िलहाल दूर की कौड़ी ही है
इधर विराट सराफ के अपहरण की घटना के सम्बंध में अपराधियों की जल्द से जल्द कार्यवाही हेतु एडिशनल एस पी सिन्हा को शहर के व्यापारियो सुरेंद्र गुम्बर, असितपाल जुनेजा, दर्शन छाबड़ा, मंजीत अरोरा, नन्दलाल पुरी,विनोद महाजन, रघुवीर सिंह चावला,शशिकांत केसरी,कैप्टन गंभीर द्वारा
ज्ञापन दिया गया है।