मस्तूरी

अवैध प्लॉटिंग के कारोबार में मस्तूरी क्षेत्र को क्यो मिला है अभयदान….न टीएनसी और न ही कॉलोनाइजर लायसेंस, फिर भी चल रहा करोड़ो का खेल

उदय सिंह

बिलासपुर – शहर के आस पास ग्रामीण क्षेत्रो में धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है, जिसमें हालही में प्रशासन ने संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू की है जहाँ नोटिस के बाद बुलडोजर भी चलाया गया है, लेकिन कार्रवाई की आंच अभी तक मस्तूरी क्षेत्र के अवैध प्लाटिंग तक नही पहुँच पाई है, जिससे इस कारोबार में जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हो गए है जो नियमों को दरकिनार कर खेतों को अघोषित रूप से कालोनी बनाने का झांसा देकर प्लॉट काटकर करोड़ो रूपये कमा रहे है और शासन को करोड़ो के राजस्व का चूना लगा रहे है। बिलासपुर से कुछ किलोमीटर की दूरी और नेशनल हाईवे होने की वजह से लोग भी कच्चे प्लॉट खरीद रहे है, और अविकसित आवासीय योजना के झांसे में फंस रहे है। ग्रामीण क्षेत्र होने की वजह से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्षेत्र में नही हुई है। जिससे दर्रीघाट,कर्रा, फोरलेन, मस्तूरी, मोहतरा, जयरामनगर, पेंड्री सहित दर्जनों ग्रामों में अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है।

न टीएनसी और न कॉलोनाइजर लायसेंस..

शासन के नियम के अनुसार किसी भी जमीन पर आवासीय योजना को लेकर सबसे पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति ली जाती है, जो केवल कॉलोनाइजर लायसेंस होने पर मिलती है, क्योकि उस आवासीय योजना के पूर्ण विकास की जिम्मेदारी उस कॉलोनाइजर की होती है, ताकि भविष्य में वहाँ रहने वाले परिवारों को सभी सुविधाएं मुहैय्या कराई जा सके, लेकिन अवैध प्लाटिंग के मामलों में कोई भी जिम्मेदार नही होता जब वहां लोग रहने लगते है तो सड़क, बिजली, पानी, नाली से लेकर सभी तरह की समस्याएं सामने आने लगती है, तब फिर प्रशासन को दोषी ठहराया जाता है और जो परेशानी लोगों को उठानी पड़ती है वह अलग, इसलिए इन नियमो को अनिवार्य किया गया है।

मस्तूरी क्षेत्र को अभयदान…

ग़ौरतलब है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है, लेकिन मस्तूरी क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारी देखने तक नही पहुँच रहे है, जिससे ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र को अभयदान मिला हुआ है, अब इस अभयदान के पीछे राजनीतिक गठजोड़ वजह है या प्लाटिंग में निश्चित कमीशन…जिसकी वजह से एक नोटिस तक सरकारी दफ्तरों से जारी नही किया जा रहा।

error: Content is protected !!