
अगर सब कुछ सही सही बैठा तो जल्द ही बिलासपुर में शवों का दाह संस्कार इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में संभव हो सकेगा

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
बिलासपुर-हालांकि इस कोशिश की शुरुआत पूर्व मंत्री बीआर यादव ने भी अपने कार्यकाल में की थी एसईसीएल ने इस काम में उनकी मदद भी की थी लेकिन किसी ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया और योजना ठंडे बस्ते में चली गई आधुनिक पद्धतियों के बीच आज भी पारंपरिक रूप से लकड़ी की चिता सजाकर शवों का अंतिम संस्कार अमानवीय भी लगता है परिजनों के समक्ष ही उनके करीबी के शव को जिस तरह अग्नि को समर्पित किया जाता है वह हृदय विदारक है साथ ही 4 से 5 क्विंटल लकड़ी और कंडो की भी आवश्यकता इसमें पड़ती है इससे जहां जंगल तबाह हो रहे हैं वही वायु प्रदूषण भी फैल रहा है एक शव के अंतिम संस्कार में कम से कम 9 से 10 हज़ार रूपए का खर्च सिर्फ चिता पर ही आ जाती है लेकिन इलेक्ट्रिक दाह संस्कार में लागत इसके करीब 10 फ़ीसदी ही आएगी विदेशों में और महानगरों में काफी सालों से शवदाह इलेक्ट्रिक मशीनों से की जा रही है अब बिलासपुर में भी इसे आरंभ करने का प्रस्ताव वार्ड क्रमांक 57 के पार्षद राजेश शुक्ला ने नगर निगम को दिया है इसमें करीब 40 से 50 लाख रुपए की लागत आएगी योजना के तहत इसकी शुरुआत पंडित देवकीनंदन दीक्षित मुक्तिधाम सरकंडा में किया जाना है इस भारी-भरकम बजट के लिए सभी पार्षदों से प्रस्ताव और सुझाव मांगे गए हैं लेकिन विडंबना देखिए कि इस मामले में भी जनप्रतिनिधि बेहद उदासीन नजर आ रहे हैं 66 में से सिर्फ अब तक 10 पार्षदों ने ही अपने सुझाव दिए हैं यह आम लोगों के साथ शहर के लिए भी बेहद जरूरी योजना है इसलिए इस पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी को मिलकर जल्द से जल्द इसे आरंभ करने पर जोर देने की आवश्यकता है।
शहर का विकास तेजी से हो रहा है और रोजाना मुक्तिधाम में पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी उसी तेजी से बढ़ रहे है परंपरागत दाह संस्कार में 3 से 4 घंटे का वक्त लगता है बरसात के दिनों में लकड़ी गीली होने से दाह संस्कार में भारी दिक्कत आती है तो वहीं इलेक्ट्रिक मशीन से यह प्रक्रिया कुछ ही पलों में पूरी हो सकती है इलेक्ट्रिक मशीन के अंदर शव के प्रवेश के बाद उच्च तापमान पर उसे कुछ ही देर में भस्म कर दिया जाता है यह मशीन बिजली से संचालित होती है लेकिन पावरकट बाधा ना बने इसलिए इस मशीन को गैस से भी चलाने का विकल्प मौजूद है फिलहाल प्रस्ताव मिलने के बाद इसी शासन को भेजने की प्रक्रिया जारी है अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही बिलासपुर मुक्तिधाम में इलेक्ट्रिक मशीन लग जाएगी यह संभवत बिलासपुर के लिए बड़ी सौगात होगी जिससे शवदाह की प्रक्रिया आसान होगी और परिजनों की भावनाओं का भी इसमें संरक्षण होगा।
बिलासपुर के पंडित देवकीनंदन दीक्षित मुक्तिधाम में इलेक्ट्रिक शवदाह मशीन लगाने का प्रस्ताव नगर निगम को मिला है जिस पर पार्षदों के सुझाव मांगे गए हैं इस मशीन की स्थापना में 50 लाख के करीब की लागत आनी है इसलिए इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है