रायगढ़

फर्जी श्रम आयुक्त की दबंगई….एनटीपीसी लारा में बिलासपुर के ठेकेदार गजेन्द्र सिंह परमार को गिट्टी-रेत का टेंडर दिलाने डाला दबाव… शातिर महा ठग गिरफ्तार

डेस्क

रायगढ़ – रायगढ़ जिले के एनटीपीसी लारा में ठगी के फिराक में पहुंचे फर्जी सहायक श्रम आयुक्त को पुसौर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उक्त घटना के तार प्रदेश के न्यायधानी यानि बिलासपुर से जुड़ा हुआ है। जहाँ पुसौर पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बगुले के भेस में कौए की तरह काम करने वाले कथित ठेकदार का नाम सामने आया है। जिसे एनटीपीसी लारा में गिट्टी और रेत का टेंडर दिलाने के लिए पूरे षड्यंत्र को रचा गया था। लेकिन झूठ कभी छुपता नही के तर्ज पर CISF के अधिकारियों ने इस पूरे कूट रचना को समझ और बड़ी घटना होने से बचा लिया है। आपको बता दे खुद को सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) बताकर अधिकारी बनने का नाटक कर रहा यह युवक एनटीपीसी में दबंगई दिखाने पहुंचा था। उसका मकसद अपने ठेकेदार गजेन्द्र सिंह परमार को गिट्टी और रेत का टेंडर दिलाना था। लेकिन उसकी नौटंकी ज्यादा देर नहीं चली, और चौकस CISF के अधिकारी और जवानों ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। पुसौर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसकी ठगी की परतें उधेड़ दीं।

गुप्त चालबाजी के इस पूरे षड्यंत्र का हो सकता है बड़ा खुलासा.? टेंडर पाने के लिए कही गिरोह के रूप में तो नही हो रहा है काम..? साम दाम दण्ड भेद के इस पूरे खेल का मास्टर माइंड आखिर कौन…?

एनटीपीसी लारा में गिट्टी और रेत के टेंडर को लेकर हुए इस पूरे खेल में इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि फर्जी सहायक श्रम आयुक्त बनकर आरोपी एनटीपीसी लारा पहुंचा था। जिसके अंदर आने एनटीपीसी लारा प्रबंधन के पास फोन भी किया गया था। यही नहीं आरोपी युवक के पास से बकायदा सहायक श्रम आयुक्त केन्द्रीय बिलासपुर का फर्जी लेटर और फर्जी शील था। जो बेखौफ एनटीपीसी लारा में अपनी धौंस जमाने के फिराक में था। इससे यह तो साफ है की इस पूरे मामले को किसी एक व्यक्ति के द्वारा अंजाम देना मुमकिन नही है। इधर मामले में पुसौर पुलिस ने फिलहाल बिलासपुर के ठेकेदार गजेन्द्र सिंह परमार का नाम उजागर किया है। ऐसे में सवाल यह है.? इस पूरे खेल का मास्टर माइंड आखिर कौन है..? क्या इस पूरे खेल के पीछे कोई गिरोह सक्रिय है.! जो सुनियोजित ढंग से टेंडर दिलाने का काम करता है। सूत्रों की माने तो इस पूरे मामले में जांच के बाद कई अनदेखे और अचंभित करने वाले खुलासे हो सकते है। जिससे यह भी साफ हो सकेगा की फर्जी सहायक श्रम आयुक्त के रूप में पहुंचने वाला आरोपी केवल एक मोहरा तो नही था.?

ऐसे खुली फर्जी अफसर की पोल

घटना 27 मार्च 2025 की है ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ऋत्विक कुमार षडंगी नामक युवक का विजिटर पास जारी किया गया था। यही नहीं एनटीपीसी में उसके लिए कॉल भी आया था जिसमें अनुरोध किया गया कि ऋत्विक कुमार षडंगी का विजिटर पास जारी करें और एनटीपीसी प्रबंधन के मानव संसाधन अनुभाग के प्रतिनिधि उन्हें रिसीव करें । विजिट पास मिलने के बाद वह बड़े ठाट से एनटीपीसी संयंत्र में दाखिल हुआ। सीधा बीएचईएल के ऑफिस पहुंचा और वहां मौजूद अधिकारियों को फंसाने लगा। उसने खुद को ASSISTANT LABOUR COMMISSIONER (CENTRAL) बताया और अधिकारियों पर धौंस जमाने लगा कि ठेकेदार, गजेन्द्र सिंह परमार (बिलासपुर निवासी) को गिट्टी और रेत का ठेका दिए जाने का दबाव बनाने लगा। शातिर दिमाग से अधिकारियों को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन कहते हैं न, “चालाकी ज्यादा दिन नहीं चलती!” बीएचईएल के अधिकारियों को उसके हावभाव पर शक हुआ। उन्होंने जब श्रम विभाग से पड़ताल की, तो सच्चाई सामने आ गई—ऋत्विक कुमार षडंगी नाम का कोई भी व्यक्ति श्रम विभाग में सहायक आयुक्त नहीं था।

पुसौर पुलिस ने आरोपी से उगलवाये राज

जैसे ही ठग की साजिश पकड़ी गई, CISF के कंपनी कमांडर ने क्यूआरटी टीम को अलर्ट किया। जवानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया और उसे पुसौर पुलिस के हवाले कर दिया। जब पुलिस ने गहराई से जांच की, तो इस फर्जी अफसर की पूरी पोल खुल गई। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि यह सबकुछ बिलासपुर निवासी गजेन्द्र सिंह परमार को टेंडर दिलाने के लिए किया जा रहा था। इसके लिए उसने कूट रचित दस्तावेज, फर्जी आईडी कार्ड और कॉल्स के जरिए श्रम आयुक्त होने का नाटक रचा। उसके पास सहायक श्रम आयुक्त केन्द्रीय बिलासपुर का फर्जी लेटर और फर्जी शील नमुना भी था ।

फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार

CISF कंपनी कमांडर की शिकायत पर पुसौर थाना में अपराध क्रमांक 75/2025, धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी ऋतिक कुमार सारंगी पिता मधुसूदन सारंगी उम्र 27 साल निवासी चांदमारी, थाना कोतवाली रायगढ़ के पास से आधार कार्ड, नकली आईडी और शील मोहर जब्त कर ली। मामले में घटना के मास्टर माइंड और उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच पुलिस कर रही है। इधर एसपी दिव्यांग कुमार पटेल के दिशा निर्देशन तथा एडिशनल एसपी आकाश मरकाम के मार्गदर्शन पर इस सनसनीखेज मामले में थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक रोहित कुमार बंजारे, उप निरीक्षक कुंदन लाल गौर, सहायक उप निरीक्षक उमाशंकर विश्वाल, आरक्षक धनुर्जय चंद्र बेहरा, दिनेश गोंड, कीर्तन यादव, ठंडा राम गुप्ता और CISF टीम की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े ठगी के खेल को नाकाम कर दिया। पुलिस आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज चुकी है ।

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