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कहते हैं कि गांधीजी जो कहते थे उस पर स्वयं पहले अमल भी करते थे। केवल कोरे भाषण का लोगों पर खास प्रभाव नहीं पड़ता जब तक कि बोलने वाला उसे स्वयं के आचरण में ना उतारे। ऐसा ही कुछ वार्ड क्रमांक एक, 27 खोली, विकास नगर के पार्षद अखिलेश चंद्र प्रदीप बाजपेई कर रहे हैं । 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर उन्होंने एक अनोखी मुहिम की शुरुआत की । प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान को साकार करने के लिए उन्होंने मुफ्त में कपड़े का थैला बना कर देने की योजना आरंभ की है। हैरानी दो वजह से है। एक तो इस बार वार्डो के आरक्षण में उनका वार्ड आरक्षित हो गया है, जिस कारण वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे और दूसरा कारण यह है कि नो प्लास्टिक अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभियान है और कांग्रेसी, नरेंद्र मोदी की हर बात के विपरीत चलना अपना धर्म समझते हैं। बावजूद इसके पार्टी लाइन के विपरीत जाकर कांग्रेस पार्षद अखिलेश चंद्र बाजपेई ने इस अनोखी मुहिम की शुरुआत अपने स्तर पर की है।

अखिलेश चंद्र बाजपेई का मानना है कि लोगों से प्लास्टिक का उपयोग बंद करने के लिए सिर्फ कहने भर से परिवर्तन संभव नहीं। इसके लिए उन्हें विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। लंबे वक्त से उनके द्वारा पार्षद कार्यालय के सामने सिलाई प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया है। अब इन्हीं प्रशिक्षित महिलाओं का सदुपयोग करते हुए उन्होंने ऐलान किया है कि लोग पार्षद कार्यालय में घर से कपड़ा लेकर आए और बदले में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की महिलाएं उन्हें निशुल्क थैला बना कर देंगी । इस अभियान की शुरुआत बुधवार गांधी जयंती पर की गई। पहले ही दिन 50 से अधिक लोग उनके पास थैला बनाने पहुंच गए। घर में मौजूद पुराने कपड़े, पुराने पेंट, शर्ट लेकर पहुंचे लोगों को अलग-अलग आकार के थैले बनाकर निशुल्क प्रदान किए गए । यह अभियान केवल गांधी जयंती तक सीमित नहीं है । वार्ड पार्षद अखिलेश चंद्र प्रदीप बाजपेई कहते हैं कि लोग निरंतर पार्षद कार्यालय में कपड़ा लाकर जमा कराए और बदले में उन्हें निशुल्क थैलियां सील कर दी जाएगी। बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग तो कई मिल जाएंगे लेकिन ऐसे लोग विरले हैं जो कहने से ज्यादा करने में विश्वास रखते हैं। अखिलेश चंद्र प्रदीप बाजपेई को भी उन्हीं लोगों में गिना जा सकता है।

कांग्रेस के पार्षद होने के बावजूद उन्होंने देशहित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान को सच करने का संकल्प ले लिया है ,क्योंकि वे देश से प्यार करते हैं और देश से बढ़कर कोई दूसरा नहीं होता। इसमें दलगत राजनीति का कोई स्थान नहीं है । इसलिए इस से ऊपर उठकर अखिलेश चंद्र प्रदीप बाजपेई पॉलिथीन उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के मकसद के साथ इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं ।उनका कहना है कि लोग धीरे-धीरे पॉलीथिन का उपयोग तभी बंद करेंगे जब उनके पास विकल्प होगा और यह विकल्प खुद उनके घर में मौजूद है । अनुपयोगी कपड़े से थैला बनाकर वे पॉलिथीन का विकल्प खुद उत्पन्न कर सकते हैं ,जिसमें वार्ड पार्षद सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं और इसमें असली भूमिका तो उन महिलाओं की है जो सिलाई सीखने के बाद अपने हुनर का राष्ट्रहित में सदुपयोग कर रही है।
