
तो पुलिस और ना ही स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही कर रहा हैं ,जिससे इनका हौसला बुलंद होता जा रहा है

सत्याग्रह डेस्क
बिलासपुर जिले में झोलाछाप डॉक्टर लगातार लोगों की जान ले रहे हैं और स्वास्थ्य अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा है । कुछ दिन पहले यह खबर आई थी कि एक झोलाछाप डॉक्टर की वजह से एक युवती की दोनों किडनी खराब हो गई । इससे पहले भी झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से कई लोगों की जान जा चुकी है। एक बार फिर एक नन्ही बच्ची झोलाछाप डॉक्टर का शिकार बन गई। तालापारा में रहने वाले मन्ना मेश्राम की 4 माह की बेटी का तबीयत खराब होने पर तालापारा के ही वैष्णव क्लीनिक में उसका इलाज कराया जा रहा था ,लेकिन फिर भी उसकी तबीयत ठीक नहीं हुई ।

तब मन्ना मेश्राम की बहन ने उसे सुझाव दिया कि बहतराई में देवांगन डॉक्टर का इलाज बेहतरीन है और इससे बच्चे की तबीयत ठीक हो सकती है। अपनी बहन की बातों पर भरोसा कर मन्ना मेश्राम बच्ची को लेकर बहतराई देवांगन क्लिनिक पहुंचे ,जहां इलाज का ढोंग कर रहे झोलाछाप डॉक्टर ने बिना किसी एलोपैथी मेडिकल डिग्री और जांच के ही बच्ची को ना जाने क्या दवा दे दी ,जिसे खाने के बाद 4 साल की शिशु की तबीयत और बिगड़ने लगी। बच्ची की हालत बिगड़ने के बाद उसे लेकर माता पिता जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया।

हैरानी इस बात की है कि जिस झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मासूम की जान गई उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई । ना तो पुलिस और ना ही स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही कर रहा हैं ,जिससे इनका हौसला बुलंद होता जा रहा है और कम पढ़े लिखे ग्रामीण भोले-भाले लोग इनके झांसे में आकर अपना धन, समय और बेशकीमती जीवन गंवा रहे हैं।