बिलासपुरसमस्या

चक्का जाम से पहले ही पहुंच गई पुलिस, नागरिकों ने पुलिस और तहसीलदार पर उतारा गुस्सा

उदय सिंह

आजाद युवा संगठन द्वारा पिछले एक सप्ताह से देवरीखुर्द चौराहे पर किए जा रहे आंदोलन के बेअसर साबित होने के बाद मंगलवार दोपहर 12:00 बजे चक्का जाम का निर्णय लिया गया था। देवरी खुर्द में भीषण जल संकट, बदहाल सड़क, जमीन का पट्टा दिए जाने जैसे कई मांगों के साथ आजाद युवा संगठन के बैनर तले नागरिक धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन प्रशासन द्वारा इसे नजरअंदाज किए जाने के बाद नागरिकों ने मंगलवार को हाईवे पर चक्का जाम का निर्णय लिया था ।इसकी खबर पुलिस को लग गई और इससे पहले कि यहां देवरीखुर्द के नागरिक चक्का जाम कर पाते पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उनके इरादों को ध्वस्त कर दिया। बूंद बूंद पानी को तरसते सूखे गले का शोर हालांकि प्रशासन के कानों तक नागरिकों ने पहुंचा दिया है।

मंगलवार को जिला प्रशासन की नींद खोलने देवरीखुर्द के निवासियों ने चक्का जाम का निर्णय लिया था लेकिन उनके इस निर्णय को आंशिक सफलता उस वक्त मिल गई जब पुलिस प्रशासन के साथ मौके पर नायब तहसीलदार राजकुमार साहू और सीएसपी कोतवाली विश्व दीपक त्रिपाठी भी पहुंच गए। नागरिकों ने इनके सामने जमकर अपनी भड़ास निकाली और विकराल समस्या से वाकिफ कराते हुए जल्द ही समस्या के निराकरण की गुहार लगाई ।आक्रोशित नागरिकों ने पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों से दो टूक कह दिया कि अगर तय मियाद में उनकी समस्या का निराकरण नहीं होता है तो फिर उनके द्वारा एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

इस मौके पर मौजूद कांग्रेस नेता अभय नारायण राय ने भी देवरीखुर्द की समस्या को शासन तक पहुंचाने की बात कही । हैरानी इस बात की है कि इस आंदोलन के सूत्रधार वहीं कांग्रेसी नेता है जो भाजपा के शासनकाल में भी इन्हीं मुद्दों पर आंदोलनरत थे और हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी उन्हें आंदोलन करना पड़ रहा है । खुद अभय नारायण राय आंदोलन की बागडोर संभालते नजर आए जबकि अभय नारायण राय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाने की जगह वे सीधे-सीधे मुख्यमंत्री तक बात पहुंचा कर भी समस्या का निराकरण कर सकते हैं । शायद यही वजह है कि भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्या ईसे नौटंकी और राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं । मस्तूरी क्षेत्र के भाजपा नेता चंद्रप्रकाश सूर्या ने कहा कि नागरिकों की समस्याओं के नाम पर कुछ नेता अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहे हैं। उनका काम ही आंदोलन करना है। यही वजह है कि निराकरण की जगह वे धरना प्रदर्शन चक्का जाम को अधिक महत्व दे रहे हैं ।अगर यह लोग चाहते तो फिर अपने नेताओं से बात कर समस्या के निराकरण की दिशा में ठोस पहल कर सकते थे और यही बात उनकी नियत स्पष्ट करती है। आजाद युवा संगठन का यह धरना प्रदर्शन कई वजहों से चर्चित रहा लेकिन अगर इस प्रदर्शन से मकसद पूरा नहीं होता है तो फिर प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं होगा। वहीं अगर इस प्रयास से देवरी खुर्द के निवासियों की समस्याएं हल होती है तो फिर इस प्रदर्शन को प्रभावी जरूर कहा जा सकता है।

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