बिलासपुर

बिलासपुर में 48 घंटे के भीतर 70 संक्रमित मरीज़ो की मौत, चौकाने वाले आंकड़े लगे डराने…..हो जाये सावधान

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ में कोरोना अब तेजी से लोगो को मौत की नींद सुला रहा है। जिसके जद में राजधानी के बाद अब न्यायधानी आ चुकि है। प्रदेश में बीते 24 घण्टो में 73 मरीजो की मौत हुई थी। जिनमे सबसे अधिक 40 मरीज बिलासपुर जिले में अपनी जान गवाई है। इन मरीजो में 32 मरीज तो बिलासपुर जिले के ही रहने वाले है। जबकि 8 मरीज दूसरे जिले के निवासी है। जिनकी मौत भी जिले के विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान हुई है। इधर गुरुवार दोपहर 4 बजे तक 30 संक्रमित मरीजो की मौत हुई है। जिनमे 21 मरीज बिलासपुर जिले के है। जबकि 9 मरीज दूसरे जिले के रहने वाले है। जिनके साथ अब जिले में कोरोना से मरने वाले मरीजो की संख्या 471 हो गई है। जिनकी मौत विभिन्न हॉस्पिटल में हुई है। आपको बता दे जिले में बीते तीन दिनों में संक्रमित मरीजो की मौत होने का सिलसिला काफी तेजी से बढ़ा है। जिले में सोमवार को 21, मंगलवार को 17 और बुधवार को 40 मरीजों की मौत हुई है। इधर स्थिति को नियंत्रण में लाने के तमाम प्रयास विफल होते जा रहे हैं। मौजूदा स्थिति में गंभीर मरीजों के उपचार की व्यवस्था के लिए अस्पताल और बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। लेकिन मरीजों की संख्या को देखते हुए यह भी कम पड़ रहे हैं। जानकारों की माने तो संक्रमित मरीजो की मौत हॉस्पिटल पहुँचने में लेटलतीफी और उचित समय मे वेंटिलेटर नही मिलने की वजह से हो रही है। जिसको लेकर फिलहाल जिला प्रशासन को और पुख्ता इंतजाम करने की जरूरत समझी जा रही है। 

मौत के लिए जिम्मेदार कौन..?

न्यायधानी में जिस हिसाब से संक्रमित मरीजो की मौत हो रही है। उसने जिले में कोरोना प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए है। इन सब के बीच न्यायधानी में 48 घण्टे में हुए 70 संक्रमितो के मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इन मौतों के जिम्मेदार कौन है…? संसाधनों की कमी या फिर स्वास्थ्य विभाग कि विफलता! या फिर आम जनता की लापरवाही! जिन्होंने कोरोना रूपी राक्षस को हल्के में लिया। इन सब के बीच न्यायधानी के 12 लाख लोगों की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग पर टिकी थी। उन्होंने कोरोना से निटपने बीते एक साल में हॉस्पिटलों में केवल 1430 बिस्तरों की व्यवस्था सुनिश्चित की! जबकि कोरोना से निपटने केवल शहरीय इलाको के 10 प्रतिशत बिस्तर की भी उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत थी। लेकिन मौजूदा हालात में जिले में 1430 बिस्तर आरक्षित किए है। इनमे भी वेंटिलेटर की व्यवस्था सीमित रही है। अब जब कोरोना ने अपना स्वरूप बदला है। तो स्वास्थ्य विभाग की सारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कारण चाहे जो भी हो अब मौत के मामले जिस हिसाब से बढ़ रहे है। उसमे संक्रमण के गिरफ्त में आते ही लोगो को चंद घंटों में ही मौत के नींद आ जा रही है। जिसको लेकर फिलहाल आम जनता अपने आप को बेसहारा ही समझ रहे है। 

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