
रमेश राजपूत
रायगढ़ – जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से रायगढ़ जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(2) के तहत आदेश जारी करते हुए जिले में किरायेदारों और घरेलू सहायकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। अब कोई भी मकान मालिक, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, उद्योग या संस्थान बिना पुलिस को सूचना दिए अपना भवन, मकान, कमरा या परिसर किराये पर नहीं दे सकेगा। जारी आदेश के अनुसार वर्तमान में रह रहे सभी किरायेदारों का पूरा विवरण भी संबंधित थाना में जमा करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का मानना है कि कई बार असामाजिक और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किराये के मकानों में रहते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और जन सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।आदेश के तहत मकान मालिकों को प्रत्येक किरायेदार का नाम, स्थायी पता, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र का विवरण तथा अन्य आवश्यक जानकारी संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध करानी होगी। बिना वैध और प्रमाणिक पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को किराये पर मकान देना प्रतिबंधित रहेगा। यह नियम केवल आवासीय मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों और संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी किरायेदार या उसके यहां आने-जाने वाले व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होती हैं तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी थाना या पुलिस चौकी को देना आवश्यक होगा। नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आदेश की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने के लिए लाउडस्पीकर, समाचार पत्रों, पुलिस थानों, सूचना पटल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए गए हैं। इस संबंध में रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सुरक्षित समाज के निर्माण में आम लोगों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी भवन स्वामियों, उद्योग संचालकों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से समय पर किरायेदारों एवं कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपराधों की रोकथाम और जिले की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।