
रमेश राजपूत
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई बिलासपुर ने संभागायुक्त सुनील जैन से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में प्राकृतिक आपदा राहत, विशेषकर सर्पदंश से मृत्यु के आर्थिक सहायता प्रकरणों में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को अनावश्यक रूप से आपराधिक जांच में शामिल किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। संघ ने कहा कि यदि किसी मामले में मिथ्या शपथपत्र, जाली हस्ताक्षर, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट या कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय से आदेश प्राप्त किए गए हों, तो कार्रवाई का केंद्र वास्तविक दोषी व्यक्ति होने चाहिए, न कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वैधानिक आदेश पारित करने वाले राजस्व अधिकारी। ज्ञापन में बताया गया कि राजस्व न्यायालय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर ही राहत संबंधी निर्णय लेते हैं।संघ ने मांग की कि न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 से 231 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रभावी जांच और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए। ऐसे मामलों को सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि “Fraud upon the Court” (न्यायालय से छल) के रूप में देखा जाए।
ज्ञापन में न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985 तथा राज्य शासन के 14 अक्टूबर 2024 के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। संघ का कहना है कि बिना प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य के केवल न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक उत्तरदायित्व तय नहीं किया जाना चाहिए। संघ ने राज्य शासन से पुलिस अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के बीच समन्वित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू करने की मांग की, ताकि राहत योजनाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इस दौरान प्रशासनिक सेवा संघ के कई पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।