बिलासपुर

बिलासपुर: अवैध वसूली प्रकरण में बड़ी कार्रवाई….शासन ने तत्कालीन एएसपी को किया सस्पेंड, स्पा संचालक के आरोपों से हिला पुलिस महकमा,

रमेश राजपूत

रायपुर – न्यायधानी बिलासपुर की पुलिस एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के एक स्पा संचालक द्वारा पुलिसकर्मियों पर मंथली अवैध वसूली और प्रताड़ना के लगाए गए आरोपों ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। इस मामले में सामने आए वीडियो और शिकायतों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर राजेन्द्र जायसवाल को निलंबित कर दिया है। गौरतलब है कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में संचालित एक्वा वेलनेस स्पा प्राइवेट लिमिटेड के संचालक लोकेश सेन ने पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर को लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ पुलिसकर्मी उनसे हर माह अवैध धनराशि की मांग कर रहे थे। जब संचालक ने इस अवैध मंथली देने से इनकार किया, तो कथित तौर पर पुलिस द्वारा उनके स्पा में बार-बार चेकिंग, कर्मचारियों और ग्राहकों से अनावश्यक पूछताछ तथा दबाव बनाकर व्यापार को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। स्पा संचालक का दावा है कि उनका प्रतिष्ठान पूरी तरह वैध है, सभी नियम-कायदों का पालन किया जा रहा है और वहां 14 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके बावजूद पुलिसिया दबाव के कारण उनका व्यवसाय बदनाम हो रहा है और कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो, जिसमें वसूली और दबाव से जुड़े कथित दृश्य दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इसके सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद रायपुर स्थित गृह (पुलिस) विभाग ने शिकायत, वीडियो क्लिप और आवेदकों के बयानों का अवलोकन किया। जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए शासन ने तत्कालीन एएसपी शहर राजेन्द्र जायसवाल को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के उल्लंघन और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत निलंबित कर दिया।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आम जनता और व्यापारिक वर्ग इसे एक अहम कदम मान रहा है, वहीं यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि शिकायत सामने न आती और वीडियो वायरल न होता, तो क्या यह कार्रवाई संभव हो पाती। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पुलिस मुख्यालय लगातार पारदर्शिता, ईमानदारी और कम्युनिटी पुलिसिंग की बात कर रहा है। फिलहाल शासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी रहेगी और दोषी पाए जाने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या अन्य जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होगी। यह प्रकरण पुलिस की साख के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

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