
उदय सिंह
बिलासपुर – सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर युवतियों से ठगी करने का मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में सामने आया है। आरोप है कि श्याम, धीरू और उनके अन्य साथियों ने मिलकर युवतियों को 60 साल की स्थायी सरकारी नौकरी लगाने का झांसा दिया और उनसे कुल 78 हजार रुपये नगद व ऑनलाइन माध्यम से ठग लिये। पुलिस ने प्रार्थिया की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थिया कमला बाई श्याम 42 वर्ष, निवासी थाना पसान जिला कोरबा ने थाना सिरगिट्टी पहुंचकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में बताया गया कि उनकी बेटी शशी श्याम ने 11 फरवरी 2026 को फोन कर रोते हुए बताया था कि कंपनी के लोगों ने उसका मोबाइल अपने पास रख लिया है और वह बात नहीं कर पा रही है। सूचना मिलने पर कमला बाई अपने दामाद के साथ सिरगिट्टी पहुंचीं और बेटी की तलाश शुरू की। बाद में शशी ने किसी तरह मोबाइल से लोकेशन भेजी, जिसके आधार पर परिजन पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और शशी श्याम सहित उसकी सहेलियों परमेश्वरी, क्रांति सिंह और नगमा खान को वहां से लेकर थाना पहुंचे। पूछताछ में सामने आया कि सभी युवतियों से अलग-अलग आरोपियों ने नौकरी लगाने के नाम पर रकम वसूली थी। शिकायत के मुताबिक, शशी श्याम से आरोपी श्याम ने 19,500 रुपये नगद लिये, जबकि नगमा खान से कंपनी में कार्यरत चांदनी नामक युवती ने 19,500 रुपये नगद लिये। इसी तरह क्रांति सिंह से आरोपी धीरू ने 19,500 रुपये और परमेश्वरी से 10,500 रुपये नगद तथा 9,000 रुपये फोन-पे के माध्यम से लिये गये। इस तरह सभी से कुल 78 हजार रुपये ठगी कर लिये गये। पीड़िताओं ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें कथित प्रशिक्षण के नाम पर कुछ दिनों तक अपने पास रखा और सरकारी नौकरी का भरोसा दिलाते रहे, लेकिन बाद में कोई नियुक्ति नहीं हुई। जब युवतियों ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। थाना सिरगिट्टी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश शुरू कर दी गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में संगठित गिरोह काम कर रहा है जो क्षेत्र में बेरोजगार युवक-युवतियों को निशाना बनाकर नौकरी का झांसा देता है। बताया जा रहा है कि ऐसे कई लोग सक्रिय हैं, जो इसी तरीके से लोगों को जाल में फंसाकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। जिनके खिलाफ़ यह पहली एफआईआर दर्ज हुई है, संभावना जताई जा रही है कि मामले में कड़ी जांच और कार्रवाई होने से बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है।