
उदय सिंह
बिलासपुर – न्यायधानी के महालक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक पर जानलेवा हमला कर करोड़ों की ज्वेलरी लूटने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और लूट की पूरी संपत्ति बरामद कर ली है। पूछताछ में सामने आया है कि यह वारदात सिर्फ लूट नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ी बड़ी साजिश का हिस्सा थी। घटना 17 फरवरी 2026 की रात की है, जब महालक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक संतोष तिवारी दुकान बंद कर सोने के आभूषण अपनी कार में रखकर घर जा रहे थे। रास्ते में अंधा मोड़ के पास आरोपियों ने कार को टक्कर मारकर रोक लिया। इसके बाद हथियार दिखाकर पिस्टल की बट और हथौड़ी से उन पर ताबड़तोड़ हमला किया और गंभीर रूप से घायल कर कार में रखे करीब 2 किलो सोना, नकदी और कार लूटकर फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीमें सक्रिय हुईं। सीसीटीवी फुटेज, साइबर इनपुट और लोकल नेटवर्क के आधार पर आरोपियों का पीछा करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में घेराबंदी कर चार मुख्य आरोपियों को दबोच लिया। उनके कब्जे से नगदी, हथियार, मोबाइल और तीन कारें बरामद की गईं। पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस गैंग को बिलासपुर के ही कुछ लोगों ने प्रॉपर्टी विवाद के चलते कारोबारी बंधु मौर्य की हत्या के लिए सुपारी दी थी। इसके लिए 25 लाख रुपये की डील तय हुई थी और एडवांस राशि भी दी गई थी। आरोपियों ने महीनों तक रेकी की, लेकिन दिसंबर 2025 में हत्या का प्रयास असफल रहा। हत्या की योजना फेल होने के बाद गैंग ने अन्य वारदातों की योजना बनाई। इनमें एक होटल कारोबारी को लूटने की कोशिश और सदर बाजार के एक ज्वेलर्स की तिजोरी तोड़ने की योजना भी शामिल थी। पुलिस के अनुसार, गैंग अत्यंत संगठित था और विभिन्न राज्यों से पेशेवर अपराधियों को बुलाया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि वारदात से पहले आरोपियों ने चोरी की गाड़ियां जुटाईं, कई दिनों तक रेकी की और पूरी योजना के तहत हमला किया।

वारदात के बाद वे अलग-अलग रास्तों से भागे, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पुलिस ने इस पूरे मामले में हत्या की साजिश, लूट, अवैध हथियार और पुलिस पर हमला सहित कई धाराओं में अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से देशी कट्टा, जिंदा कारतूस, धारदार चाकू, 5 लाख से अधिक नकदी और लूटी गई ज्वेलरी बरामद हुई है। इस बड़ी सफलता पर वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम की सराहना करते हुए नगद पुरस्कार की घोषणा की है। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है और गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
नारद श्रीवास निकला साजिश का मास्टरमाइंड

बिलासपुर में महालक्ष्मी ज्वेलर्स लूटकांड के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के नाम उजागर करते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है। पकड़े गए आरोपियों में विनोद उर्फ बिन्नु प्रजापति (अनूपपुर), करीम खान (बरेली), विजय लांबा (दिल्ली), मोनू उर्फ राहुल उर्फ गुडवा (नोएडा), इरफान अली (सीपत), नारद उर्फ सुमित श्रीवास (बिलासपुर) और राजू सोनकर (बिलासपुर) शामिल हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार नारद श्रीवास था। उसी ने बाहर राज्यों से पेशेवर अपराधियों को बुलाकर पहले प्रॉपर्टी विवाद में कारोबारी की हत्या की सुपारी दिलवाई और असफल होने पर लूट की योजनाएं बनाईं।

नारद ने ही आरोपियों को स्थानीय जानकारी, टारगेट, आवाजाही के समय और ठिकानों की रेकी कराई। इतना ही नहीं, उसने होटल में ठहराने से लेकर चोरी की गाड़ियां उपलब्ध कराने और वारदात के लिए उचित समय तय करने तक पूरी भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, नारद की मदद से ही गैंग ने महालक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक को निशाना बनाया और करोड़ों की ज्वेलरी लूट की वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस का कहना है कि नारद की भूमिका सबसे अहम रही और उसी के नेटवर्क से पूरे गिरोह का संचालन हो रहा था।