
उदय सिंह
बिलासपुर – जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र की एक मात्र नगर पंचायत और ऐतिहासिक नगरी मल्हार आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। एक ओर सरकार सुशासन और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जिले की एकमात्र नगर पंचायत मल्हार मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। हालत यह है कि नगरवासी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की चुप्पी लोगों के आक्रोश को और बढ़ा रही है। नगर की मुख्य सड़क, मेन रोड से बस स्टैंड होते हुए मंदिर तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह खस्ताहाल हो चुका है।

सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें गंदा पानी जमा रहता है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, जबकि बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश शुरू होने से पहले ही हालात इतने खराब हैं तो मानसून में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा, लेकिन जमीन पर कोई काम नजर नहीं आया।

इतिहास और धार्मिक महत्व के लिए पहचाने जाने वाले मल्हार के तालाब अब गंदगी और बदबू का अड्डा बन चुके हैं। कभी नगर की पहचान माने जाने वाले जलस्रोतों में अब कचरा, गंदा पानी और जलकुंभी फैली हुई है। लोग वहां जाना तक पसंद नहीं करते, लेकिन मजबूरी में निस्तारी और स्नान के लिए उसी गंदे पानी का उपयोग कर रहे हैं। नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई दिखाई देती है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैल रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति धार्मिक स्थलों के आसपास देखने को मिल रही है। पातालेश्वर मंदिर और देउर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों के आसपास शाम होते ही शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है।

खुलेआम चखना सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय परिवारों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए शाम के समय इन रास्तों से गुजरना तक मुश्किल हो गया है। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी की यह तस्वीर प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर की समस्याओं को लेकर न तो सत्ता पक्ष गंभीर दिखाई देता है और न ही विपक्ष। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की समस्याओं से पूरी तरह मुंह मोड़ चुके हैं।

लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक किसी को भी मल्हार की दुर्दशा की चिंता नहीं है। विकास कार्य केवल कागजों और भाषणों तक सीमित होकर रह गए हैं। ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक पहचान रखने वाला मल्हार आज बदहाली, गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है।

सवाल यह है कि आखिर कब तक नगरवासी टूटी सड़कों, बदहाल सफाई व्यवस्था और असुरक्षित माहौल के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे। अब जनता की नजर शासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी है कि वे मल्हार की दुर्दशा दूर करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या फिर विकास के दावे केवल भाषणों तक ही सीमित रहेंगे।
