
उदय सिंह
बिलासपुर – स्कूल ड्रेस में ही घर से भागकर आगरा जाने की योजना बना रहीं तीन नाबालिग छात्राओं को सिविल लाइन पुलिस ने समय रहते सुरक्षित बरामद कर लिया। ऑटो चालक की सूझबूझ और सतर्कता के चलते यह मामला पुलिस तक पहुंचा और बड़ी अनहोनी टल गई। पुलिस ने तीनों छात्राओं को थाने लाकर उनके परिजनों को बुलाया और समझाइश देकर उन्हें सौंप दिया। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के उसलापुर इलाके का है। मिली जानकारी के अनुसार गुरूनानक चौक से तीन नाबालिग छात्राएं स्कूल ड्रेस में ऑटो में बैठीं और चालक से रेलवे स्टेशन चलने को कहा। रास्ते में उन्होंने ऑटो में ही बुर्का पहन लिया और चालक से स्टेशन पर रुकने की बात कही। इस दौरान उन्होंने ऑटो चालक को आगरा जाने के लिए तीन टिकट लेने के लिए भेजने की बात कही। बातचीत के दौरान चालक को पता चला कि छात्राओं के पास करीब 20 हजार रुपये नकद और मोबाइल वॉलेट में 50 हजार से अधिक की राशि मौजूद है। तीनों लड़कियों के साथ कोई परिजन न होने और उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर ऑटो चालक ने डायल 112 पर सूचना दे दी। पुलिस ने चालक को छात्राओं को किसी तरह रोककर रखने की सलाह दी। चालक ने चतुराई दिखाते हुए छात्राओं से कहा कि बिलासपुर रेलवे स्टेशन से आगरा की टिकट नहीं मिल रही है और उन्हें उसलापुर स्टेशन चलना होगा। इसी बहाने वह उन्हें उसलापुर की ओर ले गया और रास्ते में पुलिस को जानकारी देता रहा। सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस की टीम ने ऑटो का पीछा किया और उसलापुर स्टेशन पहुंचने से पहले ही वाहन को रोक लिया। पुलिस ने तीनों छात्राओं को अपने साथ थाने लाकर पूछताछ की और बाद में उनके परिजनों को बुलाया।
समझाइश के बाद छात्राओं को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।प्राथमिक पूछताछ में सामने आया कि एक छात्रा के माता-पिता के बीच पारिवारिक विवाद और मां की दूसरी शादी के बाद घर का माहौल ठीक नहीं था। इससे परेशान होकर वह अपने पिता से मिलने आगरा जाने का फैसला कर बैठी और अपनी दो सहेलियों को भी साथ ले गई। यह घटना परिवारों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चों को सबसे अधिक भावनात्मक सहारे और संवाद की जरूरत होती है। यदि घर का माहौल तनावपूर्ण हो या बच्चों की बातों को नजरअंदाज किया जाए, तो वे गलत या जोखिम भरे कदम उठा सकते हैं। ऐसे में परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार करें, उनकी समस्याओं को समझें और समय रहते उनका समाधान निकालें, ताकि कोई भी बच्चा आवेश में आकर अपने भविष्य को खतरे में डालने वाला कदम न उठाए।