
उदय सिंह
मस्तूरी – विकासखंड के पचपेड़ी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जलसों में रविवार को हुआ सड़क हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जर्जर सड़क व्यवस्था का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। इस हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, शिवकुमार लहरें के तीन बेटे देवेंद्र, वीरेंद्र और बजरंग एक इको कार से बिलासपुर से अपने गांव लौट रहे थे। विडंबना यह रही कि बजरंग पहले ही इसी खराब सड़क पर बाइक हादसे में घायल हो चुका था और इलाज के बाद उसे घर लाया जा रहा था। लेकिन उसी रास्ते ने एक बार फिर परिवार पर कहर ढा दिया। महादेवा तालाब के पास, एक स्कूटी सवार को बचाने के प्रयास में चालक देवेंद्र का संतुलन बिगड़ा और खराब सड़क के कारण वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। यह घटना बताती है कि सड़क की हालत इतनी खराब थी कि मामूली संतुलन बिगड़ना भी जानलेवा साबित हुआ। हादसे के बाद सबसे चिंताजनक पहलू आपातकालीन सेवाओं की देरी रही।
108 और 112 पर कॉल करने के बावजूद समय पर सहायता नहीं पहुंची, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। अंततः ग्रामीणों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक देवेंद्र की मौत हो चुकी थी, जबकि बजरंग अब कोमा में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है क्या प्रशासन को इस सड़क की जर्जर स्थिति की जानकारी नहीं थी? यदि थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किया गया? और आपातकालीन सेवाएं समय पर क्यों नहीं पहुंचीं?ग्रामीणों का आक्रोश स्वाभाविक है। उनका कहना है कि जलसों-भरारी मार्ग की बदहाली लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। यह हादसा इस बात का प्रतीक है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी किस तरह आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। अब जरूरत केवल शोक जताने की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की है, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार न हो।