बिलासपुर

अचानकमार में एसीबी का शिकंजा: 50 हजार की रिश्वत लेते रेंजर-डिप्टी रेंजर गिरफ्तार…वन विभाग में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार

उदय सिंह

बिलासपुर/मुंगेली – वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व की सुरही रेंज में पदस्थ रेंजर पल्लव नायक और डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव को रिश्वत प्रकरण में दबोच लिया। एसीबी बिलासपुर की टीम ने 50 हजार रुपए की पहली किश्त लेते हुए डिप्टी रेंजर को रंगे हाथ पकड़ा, जबकि मौके पर मौजूद रेंजर की भूमिका भी रिश्वत मांगने में सामने आने पर उनके खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और उसमें व्याप्त कथित लेन-देन के खेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी के अनुसार, मुंगेली जिले के लोरमी निवासी अजीत कुमार वैष्णव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि दिसंबर 2025 में वह अपने साथियों के साथ सुरही रेंज क्षेत्र में चार पहिया वाहन लेकर घूमने गया था। इस दौरान एयर गन के साथ बनाई गई एक रील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। रील वायरल होने के बाद वन विभाग ने उसके और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वाहन जब्त कर लिया था और सभी को करीब 18 दिन जेल में भी रहना पड़ा। शिकायतकर्ता ने बताया कि जेल से छूटने के बाद वह प्रकरण में जल्द चालान पेश कराने और जप्त वाहन वापस दिलाने के लिए सुरही रेंज के डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव से मिला।

आरोप है कि श्रीवास्तव ने चालान पेश करने के नाम पर 4 से 5 लाख रुपए तक खर्चा आने और वाहन छुड़ाने के एवज में 70 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने एसीबी बिलासपुर से संपर्क किया। डीएसपी एसीबी बिलासपुर अजितेश सिंह के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी ने सुनियोजित ट्रैप कार्रवाई की। गुरुवार को शिकायतकर्ता को मित्र मिलन रेस्टोरेंट, कोटा भेजा गया, जहां उसने मांगी गई रिश्वत में से 50 हजार रुपए की पहली किश्त डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव को सौंपी। जैसे ही रकम का लेन-देन हुआ, पहले से मौजूद एसीबी टीम ने तत्काल घेराबंदी कर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। एसीबी ने आरोपी मनीष श्रीवास्तव से रिश्वत की राशि बरामद कर ली। जांच के दौरान मौके पर मौजूद रेंजर पल्लव नायक की संलिप्तता भी सामने आई, जिनके बारे में एसीबी का कहना है कि उन्होंने भी शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगने में भूमिका निभाई। इस आधार पर मनीष श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 तथा पल्लव नायक के खिलाफ धारा 7 और 12 के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले दो वर्षों में एसीबी बिलासपुर की यह 45वीं ट्रैप कार्रवाई बताई जा रही है। एसीबी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से वन विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जंगल, वन्यजीव संरक्षण और कानून पालन की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग में यदि चालान, जब्ती और राहत तक रेट पर तय होने लगे, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा? एसीबी ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी लोकसेवक रिश्वत की मांग करे, तो उसकी सूचना तत्काल एसीबी को दें। अचानकमार की यह कार्रवाई सिर्फ दो अफसरों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि वन विभाग में जड़ जमा चुके कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के तौर पर देखी जा रही है।

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