
रमेश राजपूत
रायपुर – रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की सेंट्रल ज़ोन पुलिस ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी दिलाने और फर्जी मेडिकल डिग्रियां बनाकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि गिरोह के मास्टरमाइंड सुनील प्रताप को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और कई फर्जी दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेरोजगार युवाओं और उनके परिजनों को पोस्ट ऑफिस के विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देता था। साथ ही, फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्रियां तैयार कर लोगों से मोटी रकम वसूलता था। इस पूरे नेटवर्क ने अब तक 2 करोड़ 34 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। मामले की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को हुई, जब प्रार्थी संजय निराला ने थाना सिविल लाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे समेत अन्य लोगों ने उन्हें और उनके रिश्तेदारों को नौकरी और प्रमाणपत्र दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए, लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली। इस आधार पर थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 96/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने पहले ही भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे, साक्षी सिंह और अंकित तिवारी को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ और तकनीकी जांच में सामने आया कि इस गिरोह का संचालन दिल्ली से किया जा रहा था। इसी कड़ी में पुलिस टीम को दिल्ली भेजा गया, जहां से साक्षी सिंह और बाद में मुख्य आरोपी सुनील प्रताप तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सुनील प्रताप, साक्षी सिंह के साथ मिलकर डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, पुणे के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्रियां तैयार कराता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने विभिन्न राज्यों के 30 से अधिक लोगों के लिए फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार की हैं। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इससे जुड़े लाभार्थियों की तलाश में जुटी है। यह कार्रवाई नौकरी और शिक्षा के नाम पर हो रही ठगी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।