
उदय सिंह
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक आरक्षक की याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठता और पदोन्नति विवाद के मामले में पुलिस विभाग को शिकायत का निराकरण करने का निर्देश दिया है। दरअसल याचिकाकर्ता आरक्षक चंद्रप्रकाश भारद्वाज ने दावा किया था कि उनकी नियुक्ति 27 अक्टूबर 2010 को हुई थी, लेकिन पदोन्नति के लिए जारी चयन सूची में उन्हें अपने कनिष्ठ कर्मचारियों से काफी नीचे स्थान दिया गया है।याचिका में कहा गया कि उनसे बाद में नियुक्त हुए लिलेश कुमार साहू और दिलीप तेंदुवे को सूची में ऊपर रखा गया है, जबकि उनकी वरिष्ठता के आधार पर याचिकाकर्ता का नाम उनसे पहले होना चाहिए था। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि यह वरिष्ठता सूची नहीं बल्कि पदोन्नति के लिए तैयार चयन सूची है। साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अपनी आपत्ति के संबंध में सक्षम अधिकारियों के समक्ष कोई प्रतिनिधित्व प्रस्तुत नहीं किया है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को 10 दिनों के भीतर पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी दो सप्ताह के भीतर नियमानुसार निर्णय लें। हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए यह भी आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक ऐसे कर्मचारियों की पदोन्नति का आदेश जारी न किया जाए, जिनकी नियुक्ति याचिकाकर्ता के बाद हुई है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।