
उदय सिंह
बिलासपुर – नवीन शासकीय महाविद्यालय पचपेड़ी के प्रस्तावित भवन निर्माण स्थल को बदलने के प्रयास के विरोध में ग्राम पंचायत पचपेड़ी और क्षेत्रवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि महाविद्यालय का स्थायी भवन उसी भूमि पर बनाया जाए, जिसे ग्राम पंचायत ने पूर्व में विधिवत प्रस्ताव पारित कर उपलब्ध कराया था। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भवन निर्माण स्थल बदला गया तो व्यापक जनआंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

ज्ञापन में बताया गया कि नवीन शासकीय महाविद्यालय का संचालन पिछले तीन वर्षों से शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल भवन में किया जा रहा है। महाविद्यालय के स्थायी भवन के लिए ग्राम पंचायत ने 26 अप्रैल 2025 को प्रस्ताव पारित कर आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई थी। इस प्रस्ताव पर न तो किसी विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई और न ही स्थानीय नागरिकों ने कोई विरोध किया। ग्रामीणों का आरोप है कि अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मस्तूरी द्वारा

महाविद्यालय भवन निर्माण का स्थल बदलकर अन्य स्थान पर निर्माण कराने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम पंचायत का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की जनभावनाओं के विपरीत है और इससे विद्यार्थियों के हित प्रभावित होंगे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि महाविद्यालय भवन पचपेड़ी से बाहर बनाया गया तो आसपास के हजारों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने इसे वर्षों से चली आ रही मांग और स्थानीय विकास की अनदेखी बताया।
ग्राम पंचायत ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि विद्यार्थियों के भविष्य और जनहित को प्राथमिकता देते हुए महाविद्यालय भवन का निर्माण पचपेड़ी में ही कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान सरपंच चंद्र प्रकाश कुर्रे, उपसरपंच करण टंडन, रमेश सूर्यकांत, देवेंद्र जायसवाल, विजय नामदेव, ईश्वर महिलांगे, राजेश गुप्ता, सत्तानंद, दिव्या, सुरेंद्र, मधुकर, रंजीत राय, नीतीश कुर्रे, समीर रत्नाकर, टिकेंद्र मधुकर, सोमेश्वर लहरे, किसन मधुकर, राजू रात्रे, सुरेश कुर्रे, कौशल कुर्रे, मंसाराम शांडिल्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।