
उदय सिंह
बिलासपुर – एक पिता ने अपना बच्चा खो दिया, लेकिन उसकी पत्नी को अभी तक यह भी नहीं पता कि उसकी कोख उजड़ चुकी है। वह अस्पताल के बिस्तर पर भर्ती है और परिवार इस असहनीय दुख के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आरोप है कि श्री श्याम हॉस्पिटल में इलाज और ऑपरेशन के नाम पर दोबारा 40 से 45 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया है। पहले ही इलाज में हजारों रुपये खर्च कर चुके पिता के सामने अब सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहां से लाएं? इस पूरे मामले ने अस्पताल की संवेदनशीलता और मरीजों की देखभाल को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण निवासी कृष्णा कुमार केसरवानी की पत्नी सात महीने की गर्भवती थीं। तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने पहले विनायक हॉस्पिटल में पत्नी का इलाज कराया। यहां एक रात आईसीयू में रखने के बाद उन्हें बिलासपुर के श्री श्याम हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। कृष्णा के मुताबिक, शुरुआती इलाज, एंबुलेंस, जांच, दवाइयों और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान करीब 40 से 45 हजार रुपये खर्च हो चुके थे।
दोबारा जांच कराने पहुंचे, इमरजेंसी ऑपरेशन में बच्चे की मौत
पीड़ित के अनुसार, 6 तारीख को पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में हालत में सुधार बताकर 9 तारीख को छुट्टी दे दी गई और दोबारा जांच कराने की सलाह दी गई। 11 तारीख को जब वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो जांच के दौरान बच्चे की धड़कन ठीक नहीं होने की बात कही गई। इसके बाद पत्नी को फिर आईसीयू में भर्ती किया गया और रात में इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया। दुर्भाग्य से उनके प्रीमैच्योर बच्चे को बचाया नहीं जा सका। सबसे मार्मिक पहलू यह है कि बच्चे की मौत की जानकारी उसकी मां को अब तक नहीं दी गई है। वह अस्पताल में भर्ती है, जबकि परिवार इस सदमे को अकेले झेल रहा है। ऐसे कठिन समय में महिला की देखभाल और परिजनों को संवेदनशील तरीके से जानकारी देने की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
दुख के बीच बिल का बोझ, राहत के लिए लगा रहा गुहार
कृष्णा का आरोप है कि ऑपरेशन, दवाइयों और आगे के इलाज के नाम पर अस्पताल ने फिर 40 से 45 हजार रुपये का बिल दिया है। उनका कहना है कि पहले ही अपनी क्षमता से अधिक खर्च कर चुके हैं और अब उनके पास भुगतान के लिए पैसे नहीं बचे हैं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से मानवीय आधार पर बिल में राहत देने की मांग की है।
मीडिया से मिलने से इनकार, भर्ती महिला की देखभाल पर भी सवाल

मामले की जानकारी लेने रात में जब मीडिया की टीम अस्पताल पहुंची, तो आरोप है कि डॉक्टर ने मीडिया से मिलने से मना कर दिया। वहीं, पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि भर्ती महिला को देखने के लिए डॉक्टर तो दूर, अस्पताल का कोई स्टाफ भी झांकने तक नहीं जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी शेष है। कृष्णा की पीड़ा सिर्फ बिल चुकाने की नहीं, बल्कि अपने बच्चे को खोने और अस्पताल में भर्ती पत्नी की स्थिति को लेकर भी है। उनका कहना है कि परिवार पहले ही गहरे सदमे में है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को मानवीय संवेदना दिखाते हुए उनकी आर्थिक स्थिति पर विचार करना चाहिए। अब सवाल यह है कि दुख की इस घड़ी में परिवार को राहत मिलेगी या बिल का बोझ उनकी मुश्किलें और बढ़ाएगा?

