
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – सिस्टम की एक लापरवाही ने एक माँ की कोख उजाड़ दी और दूसरी लापरवाही अब उस माँ को इंसाफ से दूर कर रही है। बिलासपुर सिम्स में नवजात की मौत के बाद शुरू हुई न्याय की लड़ाई कलेक्टर जनदर्शन की फाइलों में ही उलझ कर रह गई है। फिर भी कछुए की गति से चलने वाले प्रशासनिक सिस्टम को गति देने बेबसी के साथ अपने बच्चे को न्याय दिलाने पीड़ित परिवार एकबार फिर मंगलवार को जनदर्शन में जिला प्रशासन से न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े शासकीय हॉस्पिटल का बताया जा रहा है। जिसके खिलाफ तिफरा निवासी राहुल कुमार और उनकी पत्नी पूर्णिमा साहू ने 15 सितंबर 2026 को कलेक्टर के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में सिम्स बिलासपुर के डॉक्टरों पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए नवजात शिशु की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। जिसपर कोई उचित कार्यवाही नहीं होने के कारण उन्होंने पुनः जनदर्शन में अपनी अर्जी लगाई है। इस दौरान पीड़ित मां ने नम आँखों से मीडिया को बताया कि 21 अगस्त को वह अपना चेकअप कराने गई थी। जहा एक इंजेक्शन लगाकर उन्हें सिम्स के डाक्टरों ने भेज दिया। एक हफ्ते बाद जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो परिजन उन्हें फिर से सिम्स लेकर पहुंचे। आरोप है कि सिम्स मे उस वक्त तैनात डॉक्टरों ने वैक्यूम से डिलीवरी कराने की कोशिश की, लेकिन वैक्यूम मशीन खराब होने का हवाला देकर देरी की जाती रही। परिजनों के मुताबिक दो-दो मशीनें खराब बताई गईं। काफी देरी के बाद जब नॉर्मल डिलीवरी नहीं हुई तो आखिरकार ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में हुई इस देरी का खामियाजा नवजात को भुगतना पड़ा। बच्चे के दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाई और उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई। जहा नवजात के संघन उपचार के बाद 10 दिनों में उसकी मौत हो गई।पीड़ित माँ का आरोप है कि आपरेशन से पूर्व वार्ड में तैनात स्टाफ ने खुद माना था कि इस मामले में लापरवाही हुई है और कहा था कि इस बच्चे की जिम्मेदारी दोनों नर्स और डॉक्टर की है, अगर कुछ होता है तो इसका रिस्क उन्हीं का होगा।इस पूरे मामले में सवाल यही है कि सिम्स जैसे बड़े अस्पताल में वैक्यूम जैसी बुनियादी मशीनें खराब कैसे है.? और अगर खराब है तो समय पर ठीक क्यों नहीं कराई गई? और जब इस गंभीर मामले में शिकायत हुई तो एक महीने बाद तक जांच शुरू क्यों नहीं हुई..?