छत्तीसगढ़बिलासपुर

प्रत्याशी तय करने में छूट रहे पसीने, बिलासपुर लोकसभा सीट पर तेज हुई माथापच्ची

फिलहाल टिकट की दौड़ में कुछ नाम आगे चल रहे हैं, जिन्हें लेकर अटकलों का बाजार गर्म है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

लोकसभा चुनाव के तारीख का ऐलान हुए सप्ताह भर से अधिक का वक्त हो चुका है लेकिन अभी भी दोनों प्रमुख पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान नहीं किया है ।अभी भी प्रत्याशियों के बीच गला काट स्पर्धा जारी है। कांग्रेस ने दावेदारों की लंबी फेहरिस्त को छोटा करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केसरवानी, पूर्व अध्यक्ष विजय पांडे और अटल श्रीवास्तव के मध्य प्रत्याशी चयन का फैसला लिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार विजय पांडे इस दौड़ में पिछड़ चुके हैं और मुख्य मुकाबला विजय केशरवानी और अटल श्रीवास्तव के बीच है। मुख्यमंत्री के करीबी होने की वजह से अटल श्रीवास्तव की दावेदारी को गंभीर माना जा रहा है। वहीं विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें टिकट ना मिलने की क्षतिपूर्ति के रूप में भी संभव है कि उन्हें लोकसभा का टिकट दिया जाए। लेकिन विजय केसरवानी की दावेदारी भी कम मजबूत नहीं है। लिहाजा अब सर्वे ,आईबी और एलआईबी की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल जितने सर्वे हुए हैं उनमें यहीं निकल कर आया है कि अटल श्रीवास्तव भले ही संगठन के मजबूत नेता हो लेकिन बिलासपुर लोकसभा सीट में उन्हें इतनी लोकप्रियता हासिल नहीं है कि वह जीत हासिल कर सके। विजय केसरवानी छात्र नेता रहे हैं, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस का भी नेतृत्व उन्होंने लंबे समय तक किया है। लेकिन लंबे वक्त तक विजय केसरवानी भी लूप लाइन में रहे हैं और हाल ही में उनकी वापसी हुई है। इसलिए उनके नाम पर भी दांव खेलना कांग्रेस को भारी पड़ सकता है। मुमकिन है पार्टी किसी और को यह मौका दें । प्रदेश की मुश्किल सीटों में से बिलासपुर भी एक बन चुकी है जहां पार्टी के बड़े नेताओं को माथापच्ची करनी पड़ रही है ।ऐसा ही कुछ हाल भारतीय जनता पार्टी के साथ भी है। भारतीय जनता पार्टी भी असमंजस की स्थिति में है।

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह तय करना मुश्किल हो रहा है की जीत हासिल करने का माद्दा रखने वाले प्रत्याशी कौन है ।जब अमर अग्रवाल जैसे बड़े नेता को पराजय हासिल हो सकती है तो फिर जीत का दावा कोई नहीं कर सकता। फिलहाल अमर अग्रवाल और वर्तमान सांसद लखनलाल साहू की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। यह भी मुमकिन है कि अमर अग्रवाल के चुनाव ना लड़ने की सूरत में पार्टी डॉक्टर विनोद तिवारी को भी प्रत्याशी बना सकती है । विनोद तिवारी की छवि पढ़े लिखे और ईमानदार व्यक्ति की है ,वहीं उन्हें आर एस एस का भी समर्थन हासिल है। लेकिन हैरान उस वक्त भी नहीं होना चाहिए जब भारतीय जनता पार्टी सभी कयासों को दरकिनार अगर आलेख वर्मा को पार्टी का प्रत्याशी बना दे । भारतीय जनता पार्टी हमेशा ऐसे चौकाने वाले फैसले करती है । पिछला लोकसभा चुनाव इसका नजीर है, जब एकदम से अनजाने चेहरे लखनलाल साहू को मैदान में उतार कर मैदान फतेह किया गया था। अगले कुछ दिनों में ,संभवतः होली के बाद, नामों का ऐलान मुमकिन है। फिलहाल टिकट की दौड़ में कुछ नाम आगे चल रहे हैं, जिन्हें लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

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