
भुनेश्वर बंजारे बिलासपुर

बिलासपुर- संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज सिम्स में मरीज को खून की कमी का हवाला देकर डिस्चार्ज करने का फरमान सुनाया जा रहा है, अपने बेटे के उपचार के लिए पहुँची मां बेबस हो चुकी है, जो अब कहां जाए क्या करे कुछ समझ नही पा रही है। यह कोई पहला मामला नही है, जिसमे मरीज को वापस लौटाया जा रहा है, इसके पहले भी कई मरीज इस तरह के व्यवहार का सामना कर चुके है। दरअसल जरहाभाठा निवासी दिलबहार रात्रे की तबियत खराब थी जिसे परिजनों ने 25 अक्टूबर को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था जहाँ उसका उपचार शुरू किया गया,

इस दौरान मरीज को 1 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया, जिसके एवज में परिजनों ने 1200 रुपए भी जमा किये, इसके बाद भी मरीज की हालत में सुधार नही हुआ, डॉक्टर ने मरीज के लिवर में खराबी, पीलिया जैसी गंभीर स्थिति होने की जानकारी दी और मरीज को सिम्स रिफर किया गया, जहाँ जांच में मरीज के शरीर मे केवल 2.6 ग्राम ब्लड होने का हवाला देते हुए ब्लड लाने परिजनों को कहा गया, जहाँ केवल 1 यूनिट ही ब्लड दिया गया, जबकि मरीज को और भी ब्लड की जरूरत है, जब दोबारा परिजन सिम्स ब्लड बैंक पहुँचे तो उन्हें खाली हाथ लौटा दिया गया।

मरीज की गंभीर अवस्था को देखकर परिजन चिंतित और बेचैन है, जो ब्लड की व्यवस्था करने जूझ रहे है। जबकि सिम्स ब्लड बैंक में 12 यूनिट से अधिक ब्लड इस दौरान उपलब्ध है, बावजूद परिजनों को लौटा दिया गया।
ब्लड कैंप का आयोजन

गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुण्यतिथि के अवसर पर जगह जगह रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था, जहाँ रक्तदाताओं ने निस्वार्थ रक्तदान किया, लेकिन किसके लिए यह शायद उन्हें नही पता। निश्चित ही ऐसे ही जरूरतमंद मरीजो के लिए जिनकी जान बचाई जा सकती है, जो अपने लिए ब्लड की व्यवस्था नही कर सकते, किंतु उन्हें तो डोनर लाने का हवाला देकर खाली हाथ लौटाया जा रहा है।
प्रबंधन जिम्मेदार

निश्चित है ब्लड बैंक से ब्लड लेने के लिए ब्लड डोनेट करना जरूरी है, लेकिन ऐसे मरीजो को निशुल्क ब्लड उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है जो डोनर उपलब्ध नही करा सकते है। प्रबंधन को इसके लिए व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि जरूरतमंद मरीजों को आसानी से ब्लड मिल सके। फ़िलहाल दिलबहार रात्रे को ए पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता है, जिसके मदद के लिए मीडिया सामने आई है।