
केंद्रीय जेल बिलासपुर से एक धमकी भरा पत्र कोरबा के मुकेश यादव को मिला है जिसमें ना सिर्फ उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है बल्कि जेल में कैद उनके भाई रामखिलावन यादव को भी साजिश के तहत हत्या करने की धमकी दी गई है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
जेल से अपराधी धमकी भरा पत्र लिखते हैं, ऐसी खबरें तो कई बार आ चुकी है, लेकिन जेल के अधिकारी ही किसी से बाकायदा कार्यालयीन पत्राचार कर जान से मारने की धमकी देते हो, ऐसा मामला शायद ही कभी किसी ने देखा सुना होगा। लेकिन कोरबा सीतामणि निवासी मुकेश यादव ने ऐसा ही एक पत्र आई जी के सामने पेश कर सनसनी पैदा कर दी है। मामला काफी समय से सुर्खियों में है । 6 अक्टूबर 2018 को केंद्रीय जेल बिलासपुर में रामखिलावन यादव नाम के एक कैदी के साथ लंबरदार राजेंद्र गुप्ता और अन्य कैदियों ने मारपीट की थी । बताया जा रहा है कि अष्टकोण प्रभारी सोनल डेविड के इशारे पर कैदी के साथ मारपीट की गई थी। इस मारपीट में रामखिलावन बेहद बुरी तरह जख्मी हुआ था और उसका लंबे वक्त तक बिलासपुर अपोलो में ईलाज भी चला था। जिसके बाद उसकी हालत सुधरी। लेकिन इस मामले में रामखिलावन के भाई मुकेश यादव शुरू से ही विरोध में मुखर थे ।उन्होंने इस मामले को हर मंच पर उठाया और उन्हीं के प्रयास से जेल प्रबंधन को घुटने टेकने पड़े। हाल ही में मुकेश यादव को सरकारी डाक से एक पत्र मिला। यह पत्र केंद्रीय जेल बिलासपुर के जेल अधीक्षक के लेटर हेड में लिखा गया है और इसमें अष्टकोण प्रभारी सोनल डेबिट के सील और हस्ताक्षर भी है। मुकेश यादव की माने तो इस सरकारी पत्र में उन्हें साफ तौर पर धमकी दी जा रही है । पत्र का मजमून पढ़ने पर यह स्पष्ट भी होता है। इसमें पूरे पत्र में घटनाक्रम का जिक्र है।

जिसमें दावा किया गया है कि रामखिलावन यादव को झूठे मामले में फंसा कर उसके साथ मारपीट की गई थी और इसके लिए खेद भी जताया गया है और आग्रह भी किया गया है कि अगर मुकेश यादव इस मामले को अलग अलग मंचों पर ना उछाले और सूचना के अधिकार का प्रयोग बंद कर दे तो फिर उनके द्वारा जल्द ही रामखिलावन यादव को रिहा कर दिया जाएगा लेकिन अगर इसके उलट मुकेश यादव जेल अधिकारियों को इसी तरह परेशान करता रहा तो फिर रामखिलावन यादव को किसी और जेल में शिफ्ट कर उसकी साजिश पूर्वक हत्या करवा दी जाएगी। इतना ही नहीं पत्र में मुकेश यादव को भी यह धमकी दी गई है कि जेल के कैदियों को भेजकर गुपचुप तरीके से उसकी भी हत्या करवा दी जाएगी और ऐसा जेल में हमेशा होता है। पत्र में दावा किया गया है कि जज से लेकर अधिकारी भी केंद्रीय जेल से अपना खर्चा लेते हैं और इसलिए जेल के खिलाफ कोई कुछ नहीं कहता

अगर यह पत्र सही है तो फिर इसका मजमून बेहद खतरनाक है। ऐसी बातें अब तक सिर्फ फिल्मों और कहानियों में सुनी गई थी ।अगर यह हकीकत है तो फिर यह हकीकत दिल दहलाने वाली है। क्या सचमुच जेल के अधिकारी कैदियों को बाहर भेज कर किसी की भी हत्या करवाते हैं और उनके साथ न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारियों की भी सांठगांठ है । हैरान करने वाली बात यह है कि इतना खतरनाक पत्र जेल अधीक्षक के लेटर हेड पर लिखा गया है । लगता नहीं कि कोई भी समझदार जेल अधिकारी इतनी बड़ी चूक करेगा। लेकिन सवाल यह भी है कि कैसे किसी और के हाथ जेल अधीक्षक का लेटर हेड और सरकारी डाक से भेजने की व्यवस्था लग सकती है। इस मामले में गुरुवार को मुकेश यादव द्वारा आई जी को शिकायत की गई है। मामला बेहद संवेदनशील है । इसलिए आई जी ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है। रामखिलावन यादव के साथ मारपीट के मामले ने लंबे वक्त तक सुर्खियां बटोरी थी। अब इस मामले में नया मोड़ आता नजर आ रहा है। अगर यह पत्र असली है तो फिर केंद्रीय जेल अधीक्षक एस एस तिग्गा और अष्टकोण प्रभारी सोनल डेबिट की मुश्किलें बढ़नी तय है।