
जुगनू तंबोली

रतनपुर– 352 सालो से चली आ रही भगवान पंढरीनाथ जी की सप्त दिवसीय आषाढी महोत्सव इस वर्ष महामारी के प्रभाव के कारण सांकेतिक रूप से ही संपन्न हो हुई, भगवान पंढरीनाथ के प्रबंधक पुजारी पंडित आनंद नगरकर एवं वर्तमान पीढ़ी मे नारद बनने वाले पं. अनिरुद्ध नगरकर ने बताया कि भगवान पंढरीनाथ का उत्सव वर्ष में दो बार शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा एवं आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवम् से गुरु पूर्णिमा तक बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता रहा है,जिसमे नगर के सैकड़ो नरनारी उत्सव के गवाह बनते रहे लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण सोशल डिस्टेंसिंग एवं शासन के गाइडलाइन के अनुसार भगवान पंढरीनाथ का आषाढ़ी महोत्सव सार्वजनिक रूप से न मनाते हुए सांकेतिक रूप में परंपरा का निर्वाह करने की दृष्टि से मनाया गया।

प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल नवम को मंदिर के वरिष्ठ प्रबंधक एवं मार्गदर्शक पं.प्रभाकर पुण्डलिक राव नगरकर नारद जी की वेशभूषा धारण कर नगर भ्रमण के लिए निकलते थे इस परंपरा को सवंत 1725 मे काशीकर महराज ने प्रारंभ की थी जिसे आज भी मंदिर परिवार द्वारा निभाया जा रहा है, जो इस बार केवल मंदिर की परिक्रमा लगा कर संकेतिक रूप से इस परंपरा का निर्वहन किया गया।, इसी तरह आषाढी एकादशी को निकलने वाला नगर संकीर्तन “”दिंडी यात्रा”‘ भी नगर भ्रमण के लिए नहीं निकली और इस परंपरा को भी केवल मंदिर प्रांगण में ही संपन्न किया गया, आषाढ़ पूर्णिमा को होने वाला गोपालकाला महोत्सव इस बार केवल मंदिर परिवार में ही संपन्न कराया गया।