
बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ बंगाली समाज द्वारा तोरवा स्थित बंगाली भवन में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की गई तो वही शाम को यहां मेघा डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
देवी सरस्वती एक तरफ जहां विद्या की देवी हैं तो वहीं उन्हें साहित्य और कला की देवी भी माना जाता है। इसीलिए साहित्य साधना करने वाले और कलाकार उन्हें अपना आराध्य मानते हैं ।यही कारण है कि बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ बंगाली समाज द्वारा तोरवा स्थित बंगाली भवन में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की गई तो वही शाम को यहां मेघा डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बंगाली भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं भाजपा के संभागीय लोकसभा प्रभारी अमर अग्रवाल शामिल हुए उनके अलावा रामदेव कुमावत सुरेंद्र गुंबर समाज के अध्यक्ष आरएन नाथ पार्षद तजम्मूल हक के साथ बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे ।
इस दौरान अलग-अलग वर्गों में बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। विशेषकर बांग्ला संस्कृति को उकेरती इन प्रस्तुतियों में बंगाल को मंच पर जीवित कर दिया गया।
मंच का संचालन पल्लव धर और पूर्ति धर द्वारा किया गया। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल में राज राजेंद्र, रीता विश्वास और बुला विश्वास ने विभिन्न बिंदुओं पर विजेताओं का चयन किया। प्रतियोगिता मैं प्रथम पुरस्कार शारदा कुमार ने जीता जिन्हें 51 सो रुपए का नगद पुरस्कार और कप प्रदान किया गया। द्वितीय स्थान पर एंजल ग्रुप रहा जिन्हें साडे तीन हज़ार की नगद राशि और कप दिया गया तो वही संध्या नाग तीसरे स्थान पर रही जिन्हें 25 सो रुपए नगद और और कप प्रदान किया गया ।इसके अलावा अन्य कई पुरस्कार भी समिति की ओर से प्रदान किए गए। बंगाल में सरस्वती पूजा के दौरान इसी तरह की सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाता है जहां बंगाल की लोक संस्कृति के साथ बांग्ला साहित्य और गीत संगीत को मंच प्रदान किया जाता है। वहीं प्रयास बिलासपुर में भी प्रवासी बंग भाषियों ने की जिसमें बड़ी संख्या में जुटे बंगाली समाज के लोगों ने कार्यक्रम का आनंद लिया।