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रायपुर – पंचायत चुनाव के मामले में प्रदेश में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है कि कोई विचाराधीन कैदी जेल से ही सरपंच का चुनाव में उतरा और जीत भी दर्ज कराई है। इसके लिए राज्य निर्वाचन, न्यायालय और जेल विभाग से विशेष अनुमति ली गई और नामांकन दाखिल किया गया था। तिल्दा के सड्डू ग्राम पंचायत से नरेंद्र यादव (30) वर्ष ने नामांकन दाखिल किया था, अभी नरेंद्र को दहेज प्रताडऩा के मामले में रायपुर केंद्रीय जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में रखा गया है। चुनाव लडऩे के संबंध में एडवोकेट के माध्यम से न्यायालय से अनुमति के लिए आवेदन किया गया। कोर्ट ने जेल के सर्कुलर के अनुसार जेलर को अनुमति देने के लिए कहा। जेल के सर्कुलर में कोई प्रावधान नहीं होने के कारण जेलर ने अनुमति देने इंकार कर दिया।

इसके बाद एडवोकेट ने राज्य निर्वाचन आयोग से विचाराधीन बंदी होने का हवाला देकर आवेदन किया। जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन को उचित कार्रवाई के लिए निर्देशित किया। जिला निर्वाचन से अनुमति मिलने के बाद जेल में ही प्रत्याशी का शपथ पत्र नोटरी के माध्यम से तैयार किया गया था। इसके बाद जेलर को नामांकन सौंप दिया गया। नामांकन जिला निर्वाचन द्वारा स्वीकार कर अब चुनाव चिन्ह दे दिया गया था।
दूसरी बार बना सरपंच

25 वर्ष की उम्र में नरेंद्र यादव ने पहली बार सरपंच का चुनाव लड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसने अपने कार्यकाल में गांव में स्टेडियम निर्माण कराया और 3000 पौधों का रोपण करवाया। इसी तरह तलाब का गहरीकरण और पचरी निर्माण काम कराया गया। इस बार सरपंच के चुनाव में कुल 5 उम्मीदवार मैदान में थे। नरेंद्र यादव को 1540 मतो में से 799 मत मिले और 271 मतो से विजयी हुआ। गौरतलब है कि छग में पहली बार जेल में रहकर किसी विचाराधीन बंदी ने सरपंच चुनाव जीता है।