प्रवीर भट्टाचार्य

अगर इस बारिश में कुछ नहीं किया गया तो फिर बिलासपुर के लोगो को पलायन करना पड़ सकता है। यहीं भयावह हकीकत है। दरअसल बिलासपुर, देवरीखुर्द और बिल्हा क्षेत्र में पानी समाप्तप्रायः है और अगर इस बरसात में वाटर हार्वेस्टिंग, वर्षा जल संचय जैसे उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्ष में भयावह जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू हो चुकीहै। बिलासपुर की जीवनदायी अरपा नदी को बचाने युद्ध स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। जिसमें बिलासपुर के आम आदमी का सहयोग लिया जाएगा। बिलासपुर को बचाने के लिए अरपा को बचाना जरूरी है। इसलिए आगामी 11, 12, 13 जून की सुबह 6 से 8 बजे तक पूरे बिलासपुर वासियों के साथ अरपा में जल कुंभी सफाई और आगामी वृक्षारोपण की तैयारी की जाएगी।

जिसके लिए सभी बिलासपुर के नागरिको से अपील की जा रही है कि वे तय तिथी पर अरपा नदी को बचाने जरूर पहुचे। लोगो और संस्थाओ से इस दौरान दस्ताने, रापा, घमेला आदि सहायक उपकरण लाने की भी अपील कलेक्टर डाॅ. संजय अलंग ने की है। वृहद स्तर पर किए जा रहे प्रयास को वर्ष भर जारी रखने की बात भी कही गई है। साथ ही भूगर्भ जल को रिचार्ज करने अनिवार्य रूप् से वाटर हार्वेस्टिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर सोमवार को कलेक्टर, एसपी, निगम आयुक्त, और जिला पंचायत सीईओ ने शहर के इलेक्ट्राॅनिक चैनल और अखबार के संपादको एवं प्रमुखो से चर्चा कर रायशुमारी ली । अब अन्य सामाजिक संगठनो से भी बातचीत कर आगामी कार्ययोजना की रूपरेखा तय की जाएगी। योजना के तहत इस वर्ष बारिश के मौसम में अरपा नदी के दोनों तटों पर पौधे नहीं बल्कि 4 से 5 फीट ऊंचे वृक्ष लगाए जाएंगे ताकि यहां मिट्टी का कटाव रुके और जल का संचय हो सके। शहर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी अरपा नदी को बचाने सुझाव लिए जा रहे हैं।

इसके लिए आने वाले दिनों में लगातार बैठके की जाएगी। वही संयुक्त प्रयास से अरपा नदी की सफाई और बाद में अरपा नदी में जल संचय की कोशिश की जाएगी ।अगर इस जीवंत शहर को बचाना है तो, फिर सब को यह आखरी प्रयास करना होगा। अगर जीवनदायिनी अरपा नदी नहीं बचेगी तो फिर बिलासपुर शहर का भी अस्तित्व नहीं होगा बेंगलुरु और केपटाउन की तरह बिलासपुर भी जीरो डे की ओर बढ़ रहा है ।इससे पहले कि बिलासपुर में पानी पूरी तरह खत्म हो जाए हर आम और खास को मिलकर प्रयास करना होगा कि बिलासपुर में इस बरसात के मौसम में अंडरग्राउंड वाटर जरूर रिचार्ज हो यह कोशिश कानून और नियमों का डंडा चला कर नहीं किया जा सकता बल्कि इसके लिए हर आम आदमी को खुद जागरूक होना होगा क्योंकि यह उनके भी अस्तित्व का सवाल है। इसलिए उम्मीद की जा रही है की 11 12 और 13 जून की सुबह बिलासपुर का एक-एक नागरिक, बच्चे, बूढ़े युवा ,खासकर छात्र-छात्राएं जोशो खरोश के साथ अरपा नदी पर इकट्ठा होंगे और मिलकर 3 दिनों में अरपा में यहां से वहां तक मौजूद विनाशकारी जलकुंभी को निकाल कर अरपा को सांस लेने में मदद करेंगे। सोमवार की बैठक में संपादकों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिसमें एनीकट निर्माण, नाली के पानी को नदी में ना छोड़े जाने, वृहद पैमाने पर पेड़ लगाने और पेड़ों के संरक्षण की जवाबदेही पेड़ लगाने वाले पर देने, रेत उत्खनन रोकने, जैसे सुझाव यहां दिए गए।
