
उदय सिंह

मस्तूरी – प्रदेश में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने तो कृषि कार्यो को प्रभावित कर भारी नुकसान पहुँचाया ही है, जिसमें खेत में रखी फसलों को तो नही बचाया जा सका लेकिन इसके साथ ही धान खरीदी केंद्रों में पहुँच चुके धान को भी सुरक्षित नही रखा जा सका। इतनी बड़ी व्यवस्था और खरीदी प्रक्रिया होने के बावजूद इस तरह की लापरवाही जगह जगह सामने आई है।

मस्तूरी क्षेत्र के मल्हार के पास ग्राम भरारी में स्थित सेवा सहकारी समिति में अब तक 24 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है, लेकिन इनके रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नही होने से यह फसल भी बारिश में बुरी तरह भीग गई है, तस्वीरों से साफ समझा जा सकता है कि किस तरह की व्यवस्था की गई है।

खुले आसमान के नीचे धान की बोरिया रखी गई है, न तो चबूतरे और न ही ढकने के लिए तिरपाल है, जिसकी वजह से खरीदी गई धान की बोरिया तरबतर हो गई है। जब इस व्यवस्था के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि केंद्र में पर्याप्त तिरपाल नही है, जिसकी वजह से धान को भीगने छोड़ दिया गया,

वही एक कमी और बताई गई कि 24 हजार क्विंटल में से अब तक केवल 3 हजार क्विंटल का ही उठाव केंद्र से किया गया है, जिसकी वजह से यहां धान का जमाव को गया है, हालांकि देर सबेर परिवहन तो किया जाता लेकिन खरीदी केंद्र में ऐसी लापरवाही की ढकने तक के लिए कोई प्रयास नही किया जाना,

राज्य सरकार के किसान हितैषी मंशा को चोटिल करने वाला है, साथ ही अफसरशाही के दावों को खोखला साबित करने वाला है, क्योकि यह धान खरीदी पहली बार नही हो रही

बावजूद इसके इतने वर्ष का अनुभव यही दर्शा रहा है कि किसानों की मेहनत और आम जनता के टेक्स का पैसा कैसे बर्बाद किया जाता है।
