
बिलासपुर में दो बड़े पहलवानो ने नूरा कुश्ती का पिछले 10 वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया और शहर की जनता ठगी हुई दर्शक की तरह इस कुश्ती को देखने मजबूर है

आकाश दत्त मिश्रा
वर्ष 2008 से बिलासपुर में सीवरेज प्रोजेक्ट के नाम से शुरू हुई सड़कों की खुदाई का विरोध तत्कालीन सत्ता पक्ष के पार्टी के अलावा पूरे शहर ने किया था। लोग सीवरेज की बेतरतीब खुदाई से इतने हलाकान थे की सड़कों पर उतर कर आंदोलन को मजबूर हो गए थे। शहर की इस भीड़ के साथ देश की बड़ी पार्टी भी कंधे से कंधा मिलाकर विरोध प्रदर्शन कर रही थी। लेकिन वर्ष 2018-19 में सत्ता में परिवर्तन के साथ सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए जो विरोध कांग्रेस करती थी, अब वह विरोध की बयार थम सी गई है कल तक जो इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह फेल साबित करते थे,और हर हाल में इस प्रोजेक्ट को बंद करने के लिए गला फाड़ते थे आज वें इस प्रोजेक्ट पर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं सोचने वाली बात है कि आखिर क्या वजह होगी की कल तक जो राजनैतिक पार्टी सीवरेज प्रोजेक्ट को पूरी तरह फेल बताते हुए पैसे की बर्बादी की दुहाई देते हुए इसके विरोध में खड़ी थी और तत्काल इसे बंद करने के लिए आतुर था।आज सत्ता कांग्रेस के हाथों में है इन सब के बाद भी शहर की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विरोध प्रकट करने वाली कांग्रेस अचानक चुप क्यों हो गई और जबकि सीवरेज का कार्य अभी भी निरंतर जारी है आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीवरेज प्रोजेक्ट को सन 2008 से शुरू किया गया था और इसे पूरा करने की अवधि सिर्फ 2 वर्ष की थी समय बीतता गया सीवरेज प्रोजेक्ट के अधिकारी और प्रशासन में बैठे जिम्मेदार कर्मचारियों की मिली जुली

लापरवाही के चलते या प्रोजेक्ट 2 वर्ष से लेकर आज 10 वर्षों के कगार पर आकर खड़ा हो गया है बीच बीच में प्रशासन ने अपनी आंखों से पट्टी हटा कर शहरवासियों के हित में सीवरेज अधिकारियों को समय सीमा देने की औपचारिकता पूरी भी की ,लेकिन इस बार सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए सातवीं बार डेडलाइन दी गई है कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी कि यह डेड लाइन सातवें से दसवीं भी हो जाए बहरहाल बिलासपुर कलेक्टर श्री अलंग ने सीवरेज का कार्य दिसंबर तक पूर्ण करने के कड़े आदेश दिए हैं लेकिन यह बिलासपुर की जनता जानती है ऐसे कड़े आदेश पहले भी कई मर्तबा दिए जा चुके हासिल कुछ भी नहीं होता एक तरफ करोड़ों की राशि शहर की सड़कों के नीचे लगाई जा चुकी है बची खुची लाखों की राशि बचाने में समझदारी है या फिर उन्हें भी प्रायोगिक तौर पर सड़को के भीतर लगा दिया जाए यह चिंतन का विषय है लेकिन कल तक जिनके लिए यह प्रोजेक्ट पूरी तरह फेल था आज आंखों में पट्टी बांधकर और मुंह में चुप्पी साध कर सीवरेज के कार्य को बर्दाश्त कर रहे जोकि आसानी से गले नहीं उतरता ।पुरानी कहावतों में एक वाक्य है “नूरा कुश्ती” इस एक वाक्य से बात पूरी स्पष्ट होती नजर आ रही है। दरअसल नूरा कुश्ती एक ऐसी कुश्ती है जिसमें दोनों पहलवानों में पहले से तय होता है कि एक दूसरे को चित नहीं गिरायेंगे।बस इसी से समझ जाइए कि बिलासपुर में दो बड़े पहलवानो ने नूरा कुश्ती का पिछले 10 वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया और शहर की जनता ठगी हुई दर्शक की तरह इस कुश्ती को देखने मजबूर भी है। शहर की जनता तब भी हलाकान परेशान थी अभी भी हलाकान परेशान है।