

बिलासपुर- आदिवासी समाज प्रकृति की पूजा करते हैं। पेड़-पौधे उनके देवता हैं। उनकी हर गतिविधि में प्रकृति की छाप दिखती है। उनके कारण ही जंगल बचा है। प्रकृति के साथ संतुलन बनाने के लिये आदिवासी विभिन्न पर्व मनाते हैं। यह किसी समाज में नहीं होता। प्रकृति प्रेम आदिवासी समाज में कूट-कूटकर भरा है। यह उद्गार प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उईके ने रविवार को गोंड़वाना समाज के नवाखाई कार्यक्रम एवं सामाजिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। तोरवा के सिंधु भवन में आयोजित गोंड़वाना समाज के इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी समाज की प्रकृति सरलता, स्वाभिमान और भोलापन है। इसी प्रकृति के कारण उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता है। वे अपने अधिकारों से वंचित है। आदिवासियों के दर्द और तकलीफ को देखकर ही उन्होंने नौकरी छोड़ी और राजनीति में आकर उनकी सेवा के लिये तत्पर है।

जो विश्वास और उम्मीद उनसे की गई हैं वे उन्हें पूरा करने की कोशिश करेंगी। राज्यपाल ने कहा कि संवैधानिक पद पर होने के नाते जनता की परेशानी को दूर करने उन्होंने शासन को दिशा-निर्देश दिया है कि ऐसी नीति बनाई जाये, जिससे हर व्यक्ति सुख, शांति से रह सकें।