
उदय सिंह
बिलासपुर – तालापारा क्षेत्र में 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला की लगभग 1.90 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कथित रूप से धोखाधड़ी कर अपने नाम कराने के मामले में आरोपी को बड़ा झटका लगा है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि मामला केवल सिविल विवाद नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य से जुड़ा हुआ है। प्रकरण के अनुसार, पीड़िता गिरजा आनंद की पुत्री मंजुलता आनंद को जमीन की देखरेख और बिक्री के लिए अधिकृत किया गया था। इसी दौरान परिचय के माध्यम से उनकी मुलाकात आरोपी अंकित कुमार एक्का से हुई। आरोप है कि आरोपी ने तालापारा स्थित खसरा नंबर 254/35 की 2180 वर्गफुट भूमि को 1 करोड़ 90 लाख 86 हजार रुपये में खरीदने का सौदा किया और रजिस्ट्री के दौरान भुगतान के लिए बैंक चेक दिए जाने का उल्लेख कराया गया। हालांकि बाद में पीड़िता पक्ष को कोई भुगतान नहीं मिला और आरोपी ने राजस्व अभिलेखों में जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि उनकी आरोपी से मुलाकात रिटायर्ड आरआई मथुरा प्रसाद कश्यप नामक व्यक्ति के माध्यम से हुई थी। उनका कहना है कि मथुरा प्रसाद कश्यप और एक अन्य व्यक्ति संजोग अग्रवाल सौदे की पूरी प्रक्रिया से परिचित था। ऐसे में पीड़िता ने मामले में रिटायर्ड आरआई की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि पर्दे के पीछे जमीन माफिया हो सकते है, जिससे उनका परिवार भयभीत है।
मंजुलता आनंद ने न्यायालय और प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा है कि उनकी वृद्ध और बीमार मां की जीवनभर की जमा पूंजी समान जमीन को छलपूर्वक हड़प लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान के नाम पर दिए गए चेक भी उन्हें नहीं सौंपे गए और बाद में आरोपी ने संपर्क तोड़ दिया। पीड़िता ने पूरे प्रकरण में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा न्याय दिलाने की मांग की है।