बिलासपुर

संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को फिर काम पर लौटने नोटिस जारी, सेवा समाप्ति और उचित कार्रवाई का हवाला…फिर भी एक सूत्रीय मांग बरकरार अन्य संगठन भी आ रहे समर्थन में

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – जिले के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के वापसी को लेकर जिला प्रशासन द्वारा जारी कोशिशे अब तक नाकाफी ही साबित हो रही है। विगत चार दिनों से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल में चले जाने के बाद से उनके वापसी के लिए केवल नोटिस ही जारी किया गया है। इसके बावजूद अब तक जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का ह्रदय परिवर्तन नही हो सका है। मंगलवार को भी जिले के सभी ब्लॉकों के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को काम पर वापस लौटने जिला कलेक्टर ने आदेश जारी किया था। जिसका भी कोई असर धरातल में नही हुआ है। गौरतलब है कि जिले के 448 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले चार दिनों से अपनी एक सूत्री मांग को लेकर हड़ताल पर है। जिसके कारण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। शासन प्रशासन इनकी हड़ताल कैसे खत्म कराएं यह सोच रहें है। लेकिन एक दिन पहले 226 कर्मचारीयों ने स्वास्थ्य विभाग को अपना इस्तीफा सौप दिया है। जिसके बाद कर्मचारी संघ के पांच पदाधिकारी श्याम मोहन दुबे, प्रशांत शर्मा, मुकेश अग्रवाल, श्वेता सिंह, आशीष सिंह और अजीत सदन नाविक को नोटिस जारी कर बुधवार शाम 5:3० बजे तक अनिश्चित हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने के लिए कहा था। लेकिन कर्मचारी काम पर नहीं लैटे । पहले दिन से ही अधिकारी नोटिस और कार्रवाही की बात कर रहे लेकिन अब तक न ही कोई कार्रवाही हुई और न ही हड़ताल पर बैठे कर्मचारी काम पर लौट जिसके कारण आम लोगो को जांच इलाज संबंधि समस्या का सामना करना पड़ रहा है। 

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के समर्थन में अन्य संघ भी आने लगे सामने,,जल्द निष्कर्ष नही निकलने पर स्थित हो सकती है गंभीर..

प्रदेशभर में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के एक सूत्री मांगों को लेकर अब तक राज्य सरकार ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नही दिखाई है। जिसको लेकर कर्मचारियों में खासा रोष है। इसके विपरीत शासन स्तर से संविदा कर्मियों पर कार्यवाही करने की तैयारी होने की बात कही जा रही है। इधर प्रदेश में उक्त कार्यवाही का विरोध शुरू हो गया है। एनएचएम के समर्थन में अब अन्य संघ भी सामने आने लगे है। इसी कड़ी में बुधवार को पीएमएचएम संघ ने बिलासपुर सीएमएचओ को ज्ञापन सौप संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के मांग पूरी करने की मांग की है। अगर शासन का रवैया ऐसा ही रहा था। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार जल्द उनके आंदोलन में अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल होंगे। जिससे प्रभावित होने वाली सभी कार्यों की जिम्मेदारी शासन की होगी।

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