बिलासपुर

आम बजट 2026-27 जमीनी हकीकत से कटा, किसानों युवाओं मजदूरों और मध्यम वर्ग को राहत नहीं: दिलीप लहरिया

उदय सिंह

सीपत – केंद्रीय वित्तमंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए वर्ष 2026–27 के आम बजट पर मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिलीप लहरिया ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे जमीनी सच्चाई से कटा हुआ और आम जनता की पीड़ा को नज़रअंदाज़ करने वाला बजट बताया है। विधायक लहरिया ने कहा कि यह बजट देश के मेहनतकश वर्ग, किसानों, बेरोजगार युवाओं और मध्यम वर्ग की वास्तविक समस्याओं का समाधान देने में पूरी तरह असफल साबित होगा। विधायक लहरिया ने कहा कि सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास की बातें तो बड़े स्तर पर की हैं, लेकिन किसानों को लागत से राहत, उपज का वाजिब दाम और कर्ज़ से मुक्ति जैसे मूल मुद्दों पर स्पष्ट योजना नहीं दिखाई देती। खेती लगातार महंगी हो रही है। डीज़ल, खाद, बीज और बिजली की कीमतें किसानों की कमर तोड़ रही हैं, लेकिन बजट में राहत का ठोस रास्ता नज़र नहीं आता, लहरिया ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना देश की प्रगति संभव नहीं, लेकिन इस दिशा में बजट में वास्तविक प्रतिबद्धता कमजोर दिखती है। मस्तूरी विधायक ने युवाओं की बेरोजगारी को देश की सबसे गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि बजट में रोजगार सृजन की ठोस रणनीति का अभाव है। हर साल कौशल विकास और स्टार्टअप की बातें दोहराई जाती हैं, लेकिन गांव-शहर के युवाओं को स्थायी रोजगार कहाँ मिल रहा है? डिग्रियाँ बढ़ रही हैं, नौकरियाँ नहीं, उन्होंने तीखे स्वर में कहा। लहरिया ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बात तभी सार्थक होगी जब उन्हें वास्तविक अवसर मिलें। विधायक ने आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि रसोई गैस, खाद्य सामग्री और जीवन जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से हर घर का बजट बिगड़ा हुआ है। आम परिवार महंगाई से परेशान है, लेकिन इस बजट में उनकी रसोई और जेब को राहत देने की ठोस पहल नज़र नहीं आती। विधायक लहरिया ने कहा कि महिलाओं के स्वावलंबन, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के लिए बजट में अपेक्षित मजबूती नहीं दिखती। वहीं मध्यम वर्ग, जो टैक्स और खर्चों के दोहरे दबाव में है, उसे भी बड़ी राहत की उम्मीद थी। मध्यम वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन बजट में उसके लिए राहत से ज्यादा औपचारिक घोषणाएँ दिखती है। विधायक दिलीप लहरिया ने आरोप लगाया कि बजट की प्राथमिकताएँ आम नागरिकों से ज्यादा बड़े उद्योग समूहों की ओर झुकी हुई प्रतीत होती हैं। जब तक देश का किसान, मजदूर, युवा और छोटा व्यापारी मजबूत नहीं होगा, तब तक ‘विकास’ का दावा अधूरा ही रहेगा। कांग्रेस पार्टी जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाती रहेगी और जरूरत पड़ी तो सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। मस्तूरी क्षेत्र में सक्रिय और जनसरोकारों के मुद्दों पर मुखर रहने वाले विधायक दिलीप लहरिया की यह प्रतिक्रिया क्षेत्र में तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि लहरिया ने बजट की जमीनी हकीकत को बेबाकी से सामने रखा है, जिससे आम लोगों की भावनाओं को मजबूत आवाज़ मिली।

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