छत्तीसगढ़बिलासपुर

नरवा, गरूवा, घुरूवा अउ बाड़ी विकास के लिये गुरुवार को कलेक्टर ने मंथन सभा कक्ष में अधिकारियों की ली बैठक

इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरूवा अउ बाड़ी विकास के लिये अधिकारियों को एनजीओ की तरह कार्य करना होगा

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

गांव वालों से चर्चा कर उनका विश्वास अर्जित करने की यह गतिविधि है। योजना का प्रचार-प्रसार निचले स्तर पर जाकर करें। कलेक्टर डाॅ.संजय अलंग ने जिले में नरवा, गरूवा, घुरूवा अउ बाड़ी योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हेतु यह निर्देश दिया।
मंथन सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिले के प्रत्येक विकासखण्ड में 15 प्रतिशत गांवों में गौठान बनाने का कार्य प्रथम चरण में किया जा रहा है। जिसके तहत जिले के 7 जनपद पंचायतों के 97 ग्राम पंचायतों में गोठान बनाये जायेंगे। जिन गांवों में काम कार्य शुरू नहीं हुआ है वहां तत्काल प्रारंभ किया जाय। उन्होंने मस्तूरी विकासखण्ड के लोहर्सी में आदर्श गौठान निर्माण करने तथा हरेक ग्राम पंचायतों में बेहतर संरचना के गोठान निर्माण करने कहा। हरेक गांव में गोठान प्रभारी बनाया जाये, जो गौठान के कार्यों का सतत् निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे। चारागाह विकास के लिये भी इस्टीमेट बनाने का निर्देश दिया।
बाड़ी विकास के तहत गांव में चिन्हित जगहों पर अक्षयबाड़ी बनाने का काम किया जायेगा। जिले में 435 अक्षयबाड़ी बनाने के लिये 85.26 लाख रूपये उद्यान विभाग तथा मनरेगा के तहत स्वीकृत किये गये हैं। बाड़ी निर्माण के काम में देरी होने पर कलेक्टर ने उद्यानिकी विभाग के अधिकारी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देशित किया कि गांव वालों के साथ मिलकर चर्चा करें और उनके सहयोग से बाड़ी के लिये जगह चयन करें।
नरवा विकास हेतु जिले में 34 कार्यों के लिये 419.97 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। इस योजना के तहत स्टाॅप डेम के ऊपर नाला सफाई, नाले के गाध निकालने का कार्य एवं मिट्टी का बैक निर्माण कार्य, जलाशय का गहरीकरण एवं सफाई, नहर मरम्मत एवं सफाई, नाले के तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, व्यपवर्तन योजनाओं के नहर मरम्मत आदि कार्य किये जायेंगे। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि इन कार्यों में भी तेजी लाई जाये एवं चल रहे कार्यों का विडियोग्राफी भी कराई जाये। कलेक्टर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गोठान, नाला, बाड़ी के कार्यों में मानक संरचना के हिसाब से ही इस्टीमेट बनाई जाये। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये सब डिवीजन स्तर पर अनुभागीय अधिकारी राजस्व की अध्यक्षता में समिति गठित करें तथा दो दिन के भीतर इस समिति की बैठक भी करें। जिला स्तर पर भी कोर कमेटी गठित की गई। जिसमें वन, कृषि, उद्यानिकी, सिचांई एवं ग्रामीण एवं आरईएस विभाग के अधिकारी वर्ग शामिल की गये हैं।

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