
पहले इलाज के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिली और अब मौत के बाद मुआवजे की बाट परिजन जोह रहे हैं

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
वैसे तो मधुमक्खियां मीठा मीठा शहद देती है, लेकिन जब यही छोटी सी मधुमक्खी भड़क जाए तो, वे इंसान के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। ऐसा ही हुआ रतनपुर के चरवाहे के साथ, जिन पर मधुमक्खियों ने ऐसा हमला किया कि हमले में उनकी मौत हो गई ।
रतनपुर क्षेत्र के सांधि पारा निवासी बुजुर्ग भरत यादव 15 अप्रैल को हमेशा की तरह भैंस चराने रतनपुर खुटाघाट के पास नदिया खार गए थे। शाम करीब 4:30 बजे का वक्त था, जब पेड़ के ऊपर मौजूद मधुमक्खी के छत्ते पर एक परिंदे ने हमला कर दिया। इस हमले से भड़की मधुमक्खियां आसपास

भिनभिनाने लगी और 75 वर्षीय बुजुर्ग उनका शिकार बन गए। बुजुर्ग चरवाहे भरत यादव को मधुमक्खियों ने बुरी तरह काट लिया। कुछ बच्चों ने इसकी सूचना उनके घर पर दी, जिसके बाद 108 की मदद से उन्हें रतनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया लेकिन उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए बाद में उन्हें बिलासपुर के सिम्स रिफर कर दिया गया । सिम्स में भी दो दिन इलाज के बाद डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। जिसके बाद बुजुर्ग का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। लेकिन वहां भी इलाज ना होने पर परिजन उन्हें लेकर 29 अप्रैल को घर आ गए थे और घर पर ही बुजुर्ग का इलाज किया जा रहा था, लेकिन बुधवार तड़के भरत यादव की मौत हो गई । मधुमक्खी के काटने से ही उनकी मौत होने की बात कही जा रही है। इस मामले में दुखद पहलू यह है कि शिकायत के बावजूद वन विभाग ने मृतक के परिवार की किसी तरह की कोई मदद नहीं की।

अगर सही समय पर भरत यादव को अच्छा इलाज मिल जाता तो फिर शायद उनकी जान नहीं जाती । पहले इलाज के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिली और अब मौत के बाद मुआवजे की बाट परिजन जोह रहे हैं।