
लोग बीमार पड़ने पर अस्पताल आते हैं लेकिन अगर अस्पताल में ही हालात जानलेवा हो जाए तो फिर कोई क्या करे

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
ऐसी ही घटना मंगलवार सुबह सिम्स में घटित हुई रोज की तरह यहां ओपीडी में आने वाले मरीजों का आना जाना जारी था करीब 700 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों का भी इलाज रोज की तरह चल रहा था इसी दौरान अस्पताल के एक हिस्से में धुआं भरने लगा। किसी ने पहले इस पर ध्यान नहीं दिया लेकिन देखते ही देखते धुएं ने अस्पताल के एक हिस्से को अपनी आगोश में ले लिया जिसके बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई अस्पताल में आग लगने की खबर फैलते ही लोग बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे पता चला की अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में रेडियोलॉजी विभाग के पास मौजूद बिजली के पैनल में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी जो बिजली के तारों से होते हुए फैलती चली गई आग ने विकराल रूप तो नहीं लिया लेकिन प्लास्टिक के वायर जलने की वजह से पूरे अस्पताल में धुआं भरता चला गया सबसे अधिक परेशानी तो पीडियाट्रिक एनआईसीयू में हुई जहां 22 नवजातो का इलाज चल रहा था इस अफरातफरी के बीच भी सिम्स के कर्मचारियों ने न सिर्फ इंसानियत का परिचय दिया बल्कि अदम्य साहस दिखाते हुए वे आग बुझाने में जुट गए अस्पताल में मौजूद अग्निशमन यंत्रों की मदद से एक तरफ आग बुझाने की कोशिश शुरू हो गई तो वही एन आई सी यू में भर्ती 22 बच्चों को शिफ्ट करने का काम भी आनन-फानन में शुरू कर दिया गया।धुएं की वजह से बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी जिसे देखते हुए तत्काल 8 बच्चों को जिला अस्पताल भेजा गया तो वही 8 बच्चों को मध्य नगरी चौक के पास स्थित श्री शिशु भवन भेज दिया गया जब तक दमकल पहुंचती तब तक अस्पताल के ही इकबाल खान मोनू ठाकुर और दिनेश निर्मलकर हिम्मत का प्रदर्शन करते हुए धुएं में घुसकर आग बुझाने की कोशिश करने लगे इसी बीच सूचना पाकर सिम्स अधीक्षक बी पी सिंह और डीन पीके पात्रा भी मौके पर पहुंच गए और हालात पर काबू पाने की कोशिश तेज कर दी गई

इधर खबर शहर में आग की तरफ फैल गई सूचना पाकर अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर विधायक रश्मि सिंह सिम्स पहुंच गई उनके पहुंचने से प्रशासनिक हलचल तेज हो गई और मौके पर अधिकारियों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया हर संभव मदद का भरोसा दिलाते हुए विधायक रश्मि सिंह ने माना कि यह दैवीय आपदा है लेकिन इसमें मानवीय चूक भी संभव है इसलिए पहले ध्यान राहत कार्यों पर है जिसके बाद जरूरी हुआ तो मामले की जांच कराई जाएगी।
सिम्स में आग लगने की खबर के बाद जनप्रतिनिधियों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे के अलावा यहां पहुंचने वालों में बृजेश साहू वाणी राव जैसे नाम भी शामिल थे जिन्होंने घटना की जानकारी लेने के साथ चप्पे-चप्पे का जायजा लिया शैलेश पांडे बच्चों का हालचाल जानने शिशु भवन भी पहुंचे।

इस आगजनी की घटना से मची अफरा-तफरी से जहां एक महिला बेहोश हो गई तो वही आग बुझाने की कोशिश में बेहोश हुए इकबाल खान और मोनू ठाकुर को भी इलाज के लिए भर्ती करना पड़ा लेकिन मामले का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि शिफ्टिंग के बाद शिशु भवन में एक बच्चे की मौत हो गई हालांकि सिम्स प्रबंधन यह दावा कर रहा है कि प्रकाश पठारे और तारिणी पठारे के इस नवजात बच्ची की हालत पहले से ही गंभीर थी इसलिए उसकी मौत को आगजनी की घटना से जोड़कर नहीं देखना चाहिए लेकिन चिकित्सक बता रहे हैं कि 2 अन्य बच्चों की स्थिति भी बेहद नाजुक है इसमें से एक का इलाज जिला अस्पताल में और दूसरे का शिशु भवन में चल रहा है जाहिर है इन सब घटनाओं के बावजूद एक बड़ी घटना टल गई अगर आग अस्पताल के दूसरे हिस्सों में भी फैल जाती तो 700 बिस्तर वाले अस्पताल में ना जाने क्या कुछ हो जाता हर समय यहां हजारों की संख्या में लोग मौजूद होते हैं। सिम्स में ऐसे आपात अवस्थाओं से निपटने की कोशिश इतनी पुख्ता नहीं है जितनी होनी चाहिए। सिम्स खुद एक बीमार अस्पताल है और इसके हर विभाग में खामियां हैं शायद बिजली के तार भी इन्हीं में से एक हो जिनका मेंटेनेंस ना होने से मंगलवार को आगजनी की घटना घटी ।यह संकेत है। इसलिए अब भी नहीं संभले तो फिर इससे भी बड़ी घटनाएं मुमकिन है। मंगलवार सिम्स में आग लगने से यहां कोहराम मच गया दोपहर बाद जाकर ही हालात पटरी पर वापस लौटी ।
मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे सिम्स के रेडियोलॉजी विभाग के पास आग की चिंगारी उठी और अस्पताल के एक बड़े हिस्से में धुआं भरता चला गया हड़बड़ी में पीडियाट्रिक विभाग को खाली किया गया लेकिन फिर भी एक बच्चे की मौत हो जाने से प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। बाद में दमकल की मदद से आप पर काबू पाया गया