
विश्व थैलीसीमिया दिवस के उपलक्ष में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जज्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित शिविर में करीब 300 यूनिट ब्लड कलेक्ट किया गया

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
खून बनाया नहीं जा सकता इसलिए इसकी आपूर्ति केवल रक्तदान से ही संभव है लेकिन कई मिथकों की वजह से गर्मी के दिनों में लोग रक्तदान नहीं करते और इसी कारण इस मौसम में सभी अस्पतालों और ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी उत्पन्न हो जाती है। इस कमी को दूर करने के आलावा आम धारणा को बदलने के मकसद के साथ एक बार फिर जज्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी ने ,धिति फाउंडेशन टीम ख्वाब दीनबंधु हेल्थ फाउंडेशन के अलावा और भी कई सामाजिक संस्थानों के साथ मिलकर विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया। हाल ही में बीते विश्व थैलेसीमिया दिवस को भी इसका आधार बनाया गया । संस्था द्वारा थैलीसीमिया मेजर बच्चों को हर महीने आवश्यक रक्त की आपूर्ति की जाती है। वैसे तो संस्था कई बच्चों की पूरी जिम्मेदारी भी उठा रही है लेकिन उनको हर माह अनिवार्य रूप से लगने वाले रक्त की आपूर्ति तो केवल रक्तदान से ही संभव है।

इसी मकसद के साथ इस रविवार को सीएमडी चौक स्थित में आई एम ए भवन में सुबह 10:00 बजे से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया इस शिविर को प्रमोट करने के साथ रक्तदान के प्रति आम आदमी में जागरूकता पैदा करने के मकसद से पहुंचे पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने भी खुद रक्तदान कर मिसाल पेश की। संस्था का हौसला बढ़ाने नगर निगम आयुक्त प्रभाकर पांडे भी इसमें शामिल हुए ।सुबह से लेकर शाम तक जारी रक्तदान अभियान में 300 यूनिट ब्लड कलेक्ट किया गया।
इसबार, रक्तदान कर दूसरों की जान बचाए, हेलमेट पहन कर अपनी जान बचाये
थीम पर आयोजित रक्तदान शिविर में सुरक्षित सफर के लिए सभी रक्त दाताओं को निशुल्क हेलमेट वितरित किया गया ।स्वयं यातायात विभाग के अधिकारियों ने रक्त दाताओं को हेलमेट प्रदान करते हुए उनसे आग्रह किया कि सड़क पर बाइक चलाने के दौरान वे अनिवार्य रूप से हेलमेट पहने ताकि उनकी जान सुरक्षित रहे ।
यह रक्तदान शिविर बेहद कामयाब रहा। गर्मी के इस मौसम में जब खून की आवश्यकता अधिक होती है तब रक्त दाताओं ने बढ़-चढ़कर यहां रक्तदान किया वहीं भविष्य में थैलीसीमिया मेजर बच्चे उत्पन्न होने से बचा जाए इस मकसद से यहां निशुल्क थैलेसीमिया जांच भी की गई।

रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भवन में आयोजित शिविर में जहां रक्त दाताओं में भारी उत्साह नजर आया वही सामाजिक संस्थाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शहर के ही कुछ स्वनाम धन्य चिकित्सक कई थैलेसीमिया मेजर बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उठाने आगे आए। इससे पहले जज्बा यह काम कर रहा था लेकिन उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर और लोगों के आने से भी यह राह आसान होती नजर आ रही है। इस शिविर में एक 24 वर्षीय थैलेसीमिया मेजर पीड़ित युवती भी शामिल हुई ,जो आकर्षण की वजह रही क्योंकि आमतौर पर थैलीसीमिया मेजर बच्चे इतनी उम्र तक नहीं जीते लेकिन सही इलाज, सही समय पर रक्त की उपलब्धता और जीने की जिजीविषा की वजह से इस युवती ने असंभव को संभव कर दिखाया।

वैसे जज्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी और अन्य संस्थाएं लगातार असंभव को संभव बनाने का प्रयास कर रही है। जिनका मकसद भी यही है कि आप व्यक्ति रक्तदान के प्रति जागरूक हो क्योंकि यह उनकी सामाजिक जिम्मेदारी भी है और इसी तरह वे उन मुसीबतजदा लोगों की मदद कर सकते हैं जिन्हें समय पर रक्त उपलब्ध ना हो तो उनकी जान जा सकती है ।