
आखिरकार गुरुवार को उसे असली और नकली पुलिस का अंतर समझ आ ही गया

उदय सिंह
पुलिस भले ही अपनी छवि सुधारने के लिए कितना भी प्रयास कर ले, लेकिन जनमानस में खाकी, खौफ का ही परिचायक है। आम लोगों को भी लगता है कि वर्दी का रौब दिखाकर लोगों को धमकाया जा सकता है और मनचाहा काम कराया जा सकता है। इतना ही नहीं वर्दी का धौंस दिखाकर वसूली भी मुमकिन है और इसी काम को कई बार अपराधी किस्म के लोग अंजाम भी लेने लगते हैं। गुरुवार को ऐसा ही कुछ हुआ। सिविल लाइन की पेट्रोलिंग टीम को सूचना मिली कि कोइ व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनकर मंगला चौक के पास रास्ते में आने जाने वाले लोगों को डरा धमका कर उनसे वसूली कर रहा है। सूचना पाकर पेट्रोलिंग पार्टी मामले की तस्दीक करने पुलिस हमराह स्टाफ के साथ पहुंची तो देखा कि एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनकर केटीएम आरसी 200 क्रमांक सीजी 04 एचवी 6423 मैं बैठकर रास्ते में आने जाने वालों को धौंस दिखा कर उनसे वसूली कर रहा है। पुलिस को देखते ही वह भागने लगा। मंगला चौक पर बड़ा अजीब सा नजारा लोगों ने देखा। पुलिस को पकड़ने पुलिस के पीछे पुलिस भाग रही थी। लोगों को माजरा समझ नहीं आया, लेकिन जब असली पुलिस ने नकली पुलिस को धर दबोचा तो फिर परतें खुलती चली गई

वर्दी पहनकर ग्राम खैरताल सतनामी पारा, भाटापारा निवासी 22 वर्षीय गौतम घृतलहरे पुलिस वर्दी में वसूली कर रहा था। उसने बताया कि वह पुलिस विभाग में कभी भी नौकरी करता ही नहीं था। हालांकि अवैध तरीके से पुलिस की वर्दी पहन कर लोगों को धौंस दिखाने का यह खेल लंबे समय से खेल रहा था। उसकी मानें तो रायपुर और मुंगेली में भी वर्दी का इस्तेमाल उसने लोगों को डराने धमकाने के लिए किया है। असली पुलिस ने नकली पुलिस को धर दबोचा और उसे थाने ले आई । इस आरोपी के पास से मोटरसाइकिल के अलावा खाकी वर्दी, बैच ,बेल्ट भी पुलिस ने जप्त किए हैं । मजेदार बात यह है कि पूछताछ में उसने बताया कि जिस बाइक पर सवार होकर यह काम कर रहा था वह बाइक भी उसकी नहीं है। रायपुर के गुढ़ियारी क्षेत्र से इस बाइक को भी वह ठग कर लाया था। बताते हैं कि वाहन मालिक ने अपने इस मोटरसाइकिल को बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला था। गौतम ने बाइक खरीदने की बात कहकर उससे मोटरसाइकिल ले ली और उसको ठग कर अपने गृह ग्राम भाग गया ।इस मामले में उसके खिलाफ रायपुर में मामला भी पंजीकृत है ।पता चला कि मुंगेली क्षेत्र में भी गौतम ने एक मोटरसाइकिल कुछ दिनों पहले चोरी की थी।

कुल मिलाकर कहानी का लब्बो लुआब यही है कि गौतम घृतलहरे चोरी और ठगी का काम करता है और लोगों पर धौंस दिखाने के लिए वह खुद को कभी कभी नकली पुलिस की तरह भी पेश करता है। पुलिस की वर्दी का गलत उपयोग करने के इस मामले को पुलिस अधीक्षक ने भी गंभीरता से लिया है और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल नकली पुलिस को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है । आम तौर पर अपराधी को हर वक्त यह डर होता है कि वह पुलिस के फंदे में ना फंस जाए लेकिन गौतम धृतलहरें जैसे कुछ ऐसे भी सनकी अपराधी है जो खुद को ही पुलिस मान बैठते हैं। चोरी और ठगी के साथ नकली पुलिस बनने का यह खेल गौतम अधिक वक्त तक नहीं खेल पाया। आखिरकार गुरुवार को उसे असली और नकली पुलिस का अंतर समझ आ ही गया।