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भारत एक कृषि प्रधान देश है| देश की कुल जनसंख्या का 60 प्रतिशत आबादी इसी क्षेत्र में कार्यरत है और अपना जीवन यापन कर रहे है| ओणम पर्व का कृषि और किसानों से गहरा संबंध है| यह पर्व ऐसे समय पर मनाया जाता है, जब दक्षिण भारत में फसलें पककर तैयार होती हैं| इन फसलों में चाय, इलायची, अदरक और धान जैसी अन्य फसलें शामिल हैं। मलयाली पंचांग के अनुसार कोलावर्षम के प्रथम माह छिंगम जो कि अंग्रेजी पंचांग के अनुसार अगस्त से सितंबर महीने के बीच आता है।उस समय ओणम पर्व मानाने की परंपरा है| उत्तर भारत में हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य जब सिंह राशि व श्रवण नक्षत्र में होता है तब ओणम का त्यौहार मनाया जाता है। सूर्य के इस संयोग से दस दिन पहले ही ओणम पर्व की तैयारियां शुरु हो जाती हैं|

प्राचीन परंपरा के अनुसार यह हस्त नक्षत्र से शुरू होकर श्रवण नक्षत्र तक मनाया जाता है| ऐसी पौराणिक मान्यता है कि एक समय में महाबली नाम का असुर राजा हुआ करता था| वह अपनी प्रजा के लिये किसी देवता से कम नहीं था| अन्य असुरों की तरह वह तपोबल से कई दिव्य शक्तियाँ हासिल कर देवताओं के लिये मुसीबत बन गया|माना जाता है कि तब से लेकर अब तक ओणम के अवसर पर महाबली केरल के हर घर में प्रजाजनों का हाल-चाल लेने आते हैं और उनके कष्टों को दूर करते हैं।इसी कड़ी में रविवार को बिलासपुर में भी केरल समाज के लोगो ने ओणम पर्व हर्षोउल्लास के साथ मनाया।
भारतीय नगर स्थित अय्यप्पा मंदिर हॉल में ओणम के अवसर पर विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद ओणम की खुशियां सभी के बीच बाटी गई। पारंपरिक पूजा के साथ भव्य फूलों से सजी केरल की परंपरागत रंगोली कार्यक्रम में बनाई गई। वही महाबली राजा के स्वरूप को भी कार्यक्रम में दर्शाया गया। इस मौके पर ओणम के पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति भी हुई।