
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – जिला अस्पताल के डॉक्टरों के ऊपर एकबार फिर इलाज में लापरवाही करने का मामला प्रकाश में आया है। जहाँ परिजनों ने गर्भवती महिला के इलाज में लेट लतीफी के साथ लापरवाही बरतने के कारण महिला की मौत होने का आरोप लगाया है। जिसको लेकर हॉस्पिटल प्रबंधन के जिम्मेदार अफसर मुखदर्शी बने हुए है। परिजनों के अनुसार यह पूरा मामला पुराना बस स्टैंड स्थित मातृ शिशु हॉस्पिटल का है। जहाँ शनिवार को मंगला निवासी राजेश दुबे अपनी गर्भवती पत्नी प्रांजली दुबे को प्रसव पीड़ा होने पर सुबह 11 बजे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। जहाँ महिला को एडमिट कर लिया गया। इसी बीच दिनभर इलाज के नाम पर हॉस्पिटल में केवल खाना पूर्ति की गई। परिजनों ने जब मेडिकल स्टॉफ से जानकारी ली तो उन्होंने डॉक्टर के नही होने का हवाला देते हुए शाम को महिला के ऑपरेशन करने की जानकारी दी और कहा की शाम को पहला ऑपरेशन आपके मरीज का किया जायेगा। लेकिन यहां भी शाम 5 बजे से 10 बजे के बीच महिला का ऑपरेशन नही किया गया।
रात 10 बजे के बाद महिला को ऑपरेशन थियेटर में ले जाएगा गया। जिसके कुछ देर बाद परिजनों को महिला की हालत गंभीर होने की जानकारी देते हुए उन्हे सिम्स लेजाने कहा गया। जिससे घबराए परिजनों ने महिला को एंबुलेंस की मदद से रात 12 बजे सिम्स लेकर पहुंचे। जहाँ डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। इस मामले में मृतिका के पति राजेश दुबे ने ऑपरेशन थियेटर में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं के होने के साथ डॉक्टरो के ऊपर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है साथ ही उन्होंने मामले की शिकायत जिला प्रशासन से कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही कराने की बात कही है। बहरहाल इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
एनेस्थीसिया इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी महिला की तबीयत….
मामले में ड्यूटी डॉक्टर सीएम तिवारी की माने तो ऑपरेशन के पूर्व महिला को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया गया था। जिसके बाद ही उसे झटका आने लगा। जिस वजह से उसे तत्काल ही सिम्स रेफर किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि सर्जरी के दौरान कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई है क्योंकि सर्जरी करके उन्होंने एक स्वस्थ बच्ची को महिला के गर्भ से बाहर निकाला था।
लाखो खर्च के बाद भी ऑपरेशन थियेटर में टॉर्च के सहारे हो रहे ऑपरेशन,, जिम्मेदार सिविल सर्जन की अनदेखी से मरीजों की जान जोखिम में…

जिला अस्पताल के जीर्णोद्धार के लिए शासन द्वारा पूर्व में लाखों रुपए खर्च किए गए हैं जिसे पुराने जिला अस्पताल को मातृ शिशु हॉस्पिटल के रूप में अपडेट किया गया था। ताकि गर्भवती महिलाओं के उचित इलाज और नवजात शिशु के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो सके। मौजूदा हालात यह है कि अंचल के मरीज रोजाना दर्जनों की संख्या में डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। जहाँ आए दिन बिजली की समस्या मरीजों के के लिए जी का जंजाल बने हुए है। हो भी क्यों ना मातृ शिशु हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर में बिजली की व्यवस्था को लेकर सिविल सर्जन डा अनिल गुप्ता की उदासीनता बनी हुई है। जिसके कारण मजबूरन डॉक्टरों को टॉर्च और मोबाइल लाइट के सहारे ऑपरेशन करना पड़ रहा है। शनिवार को हुए गर्भवती महिला के मौत के मामले में भी बिजली की आंख मिचौली चल रही थी। जहाँ डॉक्टरों ने ऑपरेशन थियेटर में कई महिलाओं का टॉर्च के सहारे ऑपरेशन किया था।