रतनपुर

VIDEO:- खूंटाघाट जलाशय लबालब… वेस्टवियर से पानी हो रहा ओवरफ्लो, मनोरम दृश्य देखने उमड़ी भीड़, सिंचाई के लिए अच्छी खबर

जुगनू तंबोली

बिलासपुर – इस वर्ष छत्तीसगढ़ में मानसून ने समय से पहले ही दस्तक दे दी थी और जून माह से ही झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया था। लगातार हो रही वर्षा के चलते राज्य के कई जलाशयों में जल स्तर तेजी से बढ़ा है। बिलासपुर जिले के सीपत-मस्तूरी क्षेत्र का प्रमुख खूंटाघाट जलाशय भी इस बार समय से पहले ही भर गया है। बांध में जल स्तर अपनी अधिकतम क्षमता पर पहुंच चुका है और वेस्टवियर से पानी का ओवरफ्लो शुरू हो गया है।खूंटाघाट बांध से खारंग नदी का पानी संग्रहित किया जाता है, जो क्षेत्र के सैकड़ों गांवों और हजारों किसानों की सिंचाई व्यवस्था का आधार है। इस जलाशय से सीपत और मस्तूरी विधानसभा क्षेत्रों के लगभग सवा दो सौ गांवों के किसानों को रबी और खरीफ सीजन के लिए सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाता है। पिछले वर्ष की अच्छी बारिश के कारण बांध में पहले से ही पर्याप्त पानी था और इस वर्ष के आषाढ़ व सावन माह में हुई लगातार बारिश ने बांध को पूरी तरह लबालब कर दिया है। बांध का जल स्तर इस समय अपनी कुल क्षमता के 100 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जल संग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) में स्थित नदी-नालों से अब भी पानी का प्रवाह जारी है। इसके कारण वेस्टवियर रपटा में पानी का बहाव शुरू हो गया है, जिससे नीचे के इलाकों में बहाव बना हुआ है।

हालांकि प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से सतर्कता बरती है और आसपास के गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बांध में जल भराव की यह स्थिति न केवल किसानों के लिए सुखद समाचार लेकर आई है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई है। वेस्टवियर से गिरते पानी का दृश्य अत्यंत मनोरम है। चारों ओर हरियाली, तेज हवा और पानी की कलकल करती ध्वनि मिलकर एक सुंदर प्राकृतिक छटा प्रस्तुत करती है। इन दिनों आसपास के इलाकों सहित बिलासपुर शहर से बड़ी संख्या में लोग खूंटाघाट बांध का यह नजारा देखने पहुंच रहे हैं। युवाओं के साथ-साथ परिवार भी पिकनिक मनाने यहां आ रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। आसपास चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और जरूरी स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। बांध का लबालब होना आने वाले रबी सीजन के लिए विशेष रूप से राहत की बात मानी जा रही है। जहां एक ओर खरीफ फसलों की सिंचाई निर्बाध रूप से हो रही है, वहीं दूसरी ओर रबी फसलों के लिए भी अब पर्याप्त जल भंडारण सुनिश्चित हो गया है। क्षेत्र के कृषकों को अब जल संकट की चिंता नहीं सताएगी। इस वर्ष मानसून की मेहरबानी ने जहां प्राकृतिक सौंदर्य को निखार दिया है, वहीं कृषकों की उम्मीदों को भी संबल दिया है। खूंटाघाट बांध का यह दृश्य न केवल राहत का प्रतीक है, बल्कि एक बार फिर से यह साबित करता है कि प्रकृति यदि समय पर साथ दे, तो जनजीवन समृद्धि की दिशा में बढ़ता है।

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