
उदय सिंह
बिलासपुर – जिले के मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम कुटेला निवासी एक महिला ने आबकारी विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत की है। पीड़िता बुधवारा बाई धृतलहरें उम्र 50 वर्ष ने आरोप लगाया है कि आबकारी विभाग की एसआई ऐश्वर्या मिंज और उनकी टीम द्वारा उनके घर में अवैध रूप से छापा मारकर न केवल परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उनके एक बेटे को जबरन उठाकर ले जाया गया और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी जा रही है।पीड़िता के अनुसार, 20 जनवरी की सुबह लगभग 6:30 बजे आबकारी वृत्त बिलासपुर की टीम चार पहिया वाहन से उनके घर पहुंची। उस समय परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने कमरों में आराम कर रहे थे।

आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर के सामने बने सात फीट ऊंचे बाउंड्रीवाल को फांदकर अंदर प्रवेश किया और बिना किसी वैध कारण के घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान घर में किसी प्रकार की शराब या मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ, फिर भी अधिकारियों ने पीड़िता के बेटे दीपक कुमार धृतलहरें को जबरन अपने साथ ले गए। शिकायत में बुधवारा बाई ने बताया कि बाद में उन्हें आबकारी कार्यालय बुलाया गया, जहां वे अपनी बेटी रजनी राय, छोटे बेटे मनीष कुमार और ग्राम पंचायत कुटेला के सरपंच अनिल कुमार के साथ पहुंचीं। वहां एसआई ऐश्वर्या मिंज और अन्य कर्मचारियों द्वारा उनके साथ और उनके बेटे दीपक तथा दूसरे बेटे मनीष के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि दोनों बेटों को आबकारी कार्यालय परिसर में जबरन बैठाकर रखा गया और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि एसआई ऐश्वर्या मिंज द्वारा मामले को रफा-दफा करने के लिए उनसे दो लाख रुपये की मांग की गई। जब पीड़िता ने पैसे देने से इनकार किया और कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, तो उनके साथ मारपीट कर कार्यालय से भगा दिया गया। महिला का कहना है कि अधिकारियों द्वारा उन्हें लगातार धमकाया जा रहा है और उनके बेटों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

बुधवारा बाई ने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारी क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री को बढ़ावा देकर कमीशन वसूलते हैं, जबकि निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके घर में एक बार छापेमारी की गई थी, उस वक्त पीने के लिए रखे शराब पर कार्रवाई करने की धमकी देकर डेढ़ लाख रुपए वसूले गए थे, उसी तरह इस बार भी छापेमारी की गई लेकिन कुछ नही मिला, जिसके बाद परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का ठोस सबूत नहीं है। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोनों बेटों को तत्काल रिहा करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।