
रमेश राजपूत
बिलासपुर – समाज के माथे पर कलंक और रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक रक्षक ही भक्षक बन गया। बिल्हा थाना क्षेत्र में एक सौतेले पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी के विश्वास और उसके मासूम बचपन का लंबे समय तक शारीरिक शोषण किया। इस हैवानियत का खुलासा तब हुआ जब हॉस्टल में पढ़ाई कर रही पीड़िता को अचानक प्रसव पीड़ा हुई और उसने एक नवजात को जन्म दिया। वह बिटिया, जो आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने लिए हॉस्टल की दीवारों के पीछे अपनी पढ़ाई में जुटी थी, उसे क्या पता था कि उसके अपनों ने ही उसके दामन पर कभी न मिटने वाला दाग लगा दिया है। जब पेट में असहनीय दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया, तो वहां के डॉक्टरों और प्रबंधन के पैरों तले जमीन खिसक गई वह मासूम आठ माह की गर्भवती थी। पुलिस की संवेदनशीलता के बाद जब पीड़िता ने अपनी खामोशी तोड़ी, तो सौतेले पिता का खौफनाक चेहरा सामने आया। आरोपी गिरफ्तारी के डर से भेष बदलकर शिवरीनारायण मेले में भीख मांग रहा था, ताकि कानून के लंबे हाथों से बच सके। लेकिन कुदरत के न्याय और पुलिस की सक्रियता ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। यह मामला महज एक अपराध नहीं, बल्कि उस भरोसे की हत्या है जो एक बेटी अपने पिता पर करती है। आज वह नाबालिग मां और उसका नवजात समाज के दोहरे मानदंडों और अपने ही अतीत के जख्मों के बीच खड़े हैं। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है, लेकिन पीड़िता के मन पर लगे घाव शायद ही कभी भर पाएंगे।