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बिलासपुर – शुक्रवार को जिले में पूर्व में हुए युक्तियुक्तकरण को लेकर एससी एसटी ओबीसी महासंघ ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। जहाँ पूर्व डीईओ अनिल तिवारी के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही करने की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा है। जहां उन्होंने पूर्व डीईओ के कारनामे को वर्तमान डीईओ को भुगतने को बता संघ ने शासन के समक्ष रखा है। इस दौरान संघ के जिला अध्यक्ष सुरेश दिवाकर ने बताया कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया करते समय शिक्षको की वरिष्ठता सूची का सही मिलान नहीं कराया गया। शासन के नियमो का पालन नही करते हुए आदेश जारी किया गया। यही नहीं उन्होंने बताया कि उक्त मामले में 260 से ज्यादा शिक्षको ने दावा आपत्ति दर्ज कराई है जिस पर ठीक से संज्ञान नही लिया गया है और अपने मन मुताबिक मान्य अमान्य का खेल खेला गया हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी के विरूद्व प्रभावी कार्यवाही करते तत्काल निलंबन करना चाहिए। साथ ही मामले में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर बर्खास्त की कार्यवाही होनी चाहिए। एससी एसटी ओबीसी महासंघ के पदाधिकारियों ने उक्त मामले में जल्द उचित कार्यवाही नही होने के स्थिति में उग्र आंदोलन करने की बात कही है।
युक्तियुक्तकरण में करीब 200 शिक्षक के शिकायत हुआ मान्य, पूरी प्रक्रिया सवालों के कटघरे में…
संघ के पदाधिकारियों ने बताया की उन्हें मिली जानकारी के अनुसार युक्तियुक्तकरण में पूर्व में जिस तरह शिक्षा विभाग के अमले की पीठ थपथपाई गई थी। उसकी कलई चंद महीनों में खुल गई है। विश्वसनीय सूत्रों कि माने तो जिले में जून माह में एक साथ करीब 489 शिक्षको को युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षक की कमी से जूझ रहे स्कूलों में भेजा गया था। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में करीब 268 (50) प्रतिशत शिक्षको ने आपत्ति दर्ज कराई थी। जिसमे से करीब 200 शिक्षको कि आपत्ति जांच के बाद सही पाई गई। अगर मामले में शिक्षा विभाग के अफसरों ने सही ढंग से युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को पूरा किया था। तो आखिर करीब 40 प्रतिशत शिक्षको की आपत्ति सही क्यों हुई। इससे यह तो साफ है। कि इस पूरी प्रक्रिया में काफी षड्यंत्र रचा गया है। जिसके कारण उक्त प्रक्रिया के महीनो बाद भी प्रशासनिक अमला उन गलतियों को सुधारने अपना समय व्यतीत करने मजबूर है और इसे अंजाम देने वाले अफसर मस्त है।