
हरिशंकर पांडेय
मल्हार – तमाम गतिरोध के बाद जिला प्रशासन कराएगी दो दिवसीय भव्य महोत्सव। छत्तीसगढ़ी लोक कला, लोक संस्कृति के सबसे पुराने मंच “मल्हार महोत्सव” पुनः 8 साल बाद बड़े बजट के साथ शुरू होगा जिसकी तैयारी जोर शोर से प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। जानकारी मिली है कि यह आयोजन 28 व 29 मार्च को मेला चौक मल्हार में आयोजत होगी जिसके लिए मेला चौक के व्यापारियों को जल्द ही जगह खाली करने का अल्टीमेटम प्रशासन की तरफ से दिया गया है। वही लोक कलाकारों को प्रस्तुति देने आमन्त्रित भी कर लिया गया है जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा होगी।
मुख्य मंत्री विष्णुदेव साय ने की थी घोषणा

मुख्यमंत्री के घोषणा के बाद नगर के साथ क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। दो वर्ष पहले बिलासपुर में रामसेतु लोकार्पण व दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुचे थे जहां उन्होंने तत्कालीन मल्हार महोत्सव समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी की मांग व बिलासपुर सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के अनुशंसा पर मल्हार महोत्सव को पुनः प्रारम्भ करने की बड़ी घोषणा करते हुए 5 लाख की जगह 20 लाख की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की थी जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही महोत्सव का भव्य आयोजन होगा। परन्तु इन दो वर्षों में राजनीतिक उठापटक के चलते क्षेत्र का लोकप्रिय महोत्सव विवादों की भेंट चढ़ गया था। जिसके बाद फिर से इस वित्तीय वर्ष निकलने के पहले आयोजन होने की सुगबुगाहट हुई और एक हफ्ते पहले कलेक्टर के निर्देश पर स्थानीय जनप्रतिनिधियो व आयोजन समिति के साथ बैठक हुई, उक्त बैठक भी आपसी खींचतान के कारण सफल नही हो पाई जिसके बाद बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के नेतृत्व में महोत्व कराने का निर्णय लिया गया।
लोक संस्कृति व समरसता का गौरवशाली मंच

लोककला, लोक संस्कृति, एकता और सामाजिक समरसता की भावना को बलवती बनाने के लिए लोक गीत, लोक संगीत, लोक नृत्य को परिष्कृत तथा आमजन को छत्तीसगढ़ी गीत संगीत से जोड़ने के लिए त्रिदिवसीय लोकोत्सव तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मल्हार महोत्सव 1986 में प्रारम्भ किया था। परन्तु कुछ अवरोध व राजनीतिक लोगो की उदासीनता के कारण यह परंपरा कुछ वर्षों से बंद थी। परन्तु अब छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थानीय लोगो को उम्मीद के अनुसार बड़े बजट के साथ महोत्सव की परंपरा को मल्हार में फिर से शुरू करने का बीड़ा उठाया है। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ में लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुवात मल्हार से हुई थी तब के अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने मल्हार में “मल्हार महोत्सव” कार्यक्रम की शुरुवात की थी। जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही थी। मल्हार के वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. डॉ शंकर प्रसाद चौबे जिनकी सक्रियता से महोत्सव का भव्य कार्यक्रम पातालेश्वर मंदिर प्रांगण में हुआ था। तब से यह महोत्सव की परंपरा प्रतिवर्ष होने लगा परन्तु पिछले 8 वर्षों से आयोजन बन्द होने से लोक संगीत प्रेमियों और लोक कलाकारों में मायुषी थी।
प्रसिद्ध कलाकार मंच में दे चुके है प्रस्तुति

मल्हार महोत्सव कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक कलाकार जिनमे दुर्ग के बैतल राम साहू जो लोकगीत, ददरिया सहित अनेक विधाओं में पारंगत थे। इसी तरह “चंदैनी गोंदा” पार्टी के नाम से प्रसिद्ध दाऊ सिंग चन्द्राकर के लोकनाट्य की उस समय बड़ी ख्याति थी। इसके अलावा पंडवानी गायिका तीजनबाई व ऋतु वर्मा ने भी यहां प्रस्तुति दी है। और देवार गीत के लिए रेखा देवार को अब भी लोग याद करते है। साथ ही राजनांदगांव के पीसी लाल यादव, बिलासपुर जिले के प्रसिद्ध लोक गायक शिवकुमार तिवारी, लालजी श्रीवास, अल्का चन्द्राकर, सुरुज बाई खांडे ने भी कार्यक्रम दी है। इसके अलावा सीमा कौशिक, नीलकमल वैष्णव, लक्ष्मण मस्तूरिहा, बद्री सिंह कटेलिहा, दलीप लहरिया, बालमुकुंद पटेल सहित स्थानीय कलाकारों ने मल्हार महोत्सव में धूम मचाई है। बस्तर के गेड़ी नृत्य, रायगढ़ के कर्मा नृत्य, संगीत सरिता बालको, केदार यादव दुर्ग के नवा बिहान, गंडई पंडरिया का दूध मोंगरा, उस्ताद इस्माइल दददू खान भोपाल का तबला, मिस्टर मोरिस फ्रांसीसी कलाकर लोक गीत, मोर मयारू माटी मस्तूरी, मोर नंगरिहा किसान लोहरसी, पंथी नाच पेंड्री, ने भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को अपने कला के माध्यम से जागृत करने लगे थे इन कलाकारों को एक बार फिर से देखने व सुनने क्षेत्र के लोग आतुर है।