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बिलासपुर के हेमू नगर जैसे बड़े इलाके में जल संकट अभूतपूर्व स्थिति में है । यहां पानी क्यों इतनी किल्लत है नहीं जितना लोगों को भोगना पड़ रहा है। असल में यहां तीन पंप की मदद से पानी टंकी भरा जाता है और पानी भरने के लिए रात में पंप को चालू कर दिया जाता है लेकिन बार बार बिजली जाने की वजह से पंप ट्रिप होकर बंद हो जाते हैं और उसे फिर ऑन करने की जरूरत पड़ती है। ऐसा नहीं कर पाने की वजह से टंकी भर नहीं पा रही और लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। पानी न पहुंचने के पीछे बिजली कटौती की अहम भूमिका है लेकिन यह बात कहना प्रदेश में राजद्रोह का मामला हो सकता है। इस बीच बिजली को लेकर बिलासपुर और पूरे प्रदेश में कुछ नाटकीय घटनाक्रम सामने आए हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस ने राज़द्रोह की धारा 124a को हटाने की बात अपने घोषणा पत्र में की थी लेकिन राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मुसरा में रहने वाले मांगीलाल अग्रवाल ने बिजली कटौती को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने इनवर्टर कंपनी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की सांठगांठ की बात कही थी ।

ऐसा करते ही उनके खिलाफ राजद्रोह के तहत मामला दर्ज हो गया लेकिन अच्छी बात यह है कि स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कड़ी नाराजगी जताई और पुलिस को केस वापस लेने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि उनकी सरकार अभिव्यक्ति की आजादी की पक्षधर है। पुलिस के अति उत्साह की वजह से पुलिस की तो जग हसाई हुई ही सरकार को भी आलोचना का सामना करना पड़ा। वैसे कांग्रेस सरकार बनने के बाद अघोषित बिजली कटौती के मामले बढे या नहीं बढ़े यह तो बहस का विषय है लेकिन इस पर बातें अधिक होने लगी है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केसरवानी का मानना है कि बिजली बिल हाफ योजना को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रची जा रही है । एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उन्होंने संभागीय बिजली कार्यालय पहुंचकर अघोषित बिजली कटौती का विरोध किया। विजय केशरवानी ने यह जानना चाहा कि आखिर वह क्या वजह है जिस कारण सरकार बदलते ही सरप्लस बिजली वाले राज्य में हर तरफ बिजली की कटौती हो रही है। उन्होंने इशारों इशारों में बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा पूर्व भाजपा सरकार के इशारे पर षड्यंत्र करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी भाजपाई मानसिकता से बाहर आने को तैयार नहीं। मेंटेनेंस के नाम पर की जा रही कटौती सिर्फ कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है । यहाँ उन्होंने जल्द से जल्द व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही ।उन्होंने कहा कि ऐसा लगने लगा है कि बिजली विभाग के अधिकारी जानबूझकर सरकार की योजनाओं को विफल करने में जुटे हुए हैं।

विजय केशरवानी ने मीटर रीडिंग भी दो-तीन महीने में एक बार करने की बात कही है कॉल सेंटर में कॉल रिसीव ना किया जाने की भी शिकायत उन्होंने की है। सोशल मीडिया के इस जमाने में किसी भी खबर के वायरल होने में वक्त नहीं लगता। ऐसे में कांग्रेस के शासनकाल में बिजली कटौती और बार-बार बिजली गुल होने की बात अब व्यंग्य का विषय बन चुका है, जिसे लेकर कांग्रेसी भी सक्रिय होते नजर आ रहे हैं। सत्ता में होने की वजह से उन्हें अपनी जिम्मेदारी को समझ कर इस अघोषित बिजली कटौती को खत्म कराना होगा क्योंकि सरकार बदलने के बाद बार-बार बिजली गुल होने से लोगों की धारणाएं सरकार के प्रति नकारात्मक की बनने लगी है। इस मिथक को तोड़ना भी कांग्रेसियों को ही होगा।